मप्र में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वित तीन समितियों का गठन

 


भोपाल, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश मध्य में विभिन्न योजनाओं का जिलों में प्रभारी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन द्वारा बुधवार को तीन समितियों का गठन किया है। इनमें प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समिति, भारत औद्योगिक विकास योजना क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति और जेंडर रेस्पोंसिव बजट की समीक्षा और निगरानी के लिए अंतर्विभागीय समिति शामिल है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समिति गठित

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों में क्रियान्वित योजना की निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय ''प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समिति'' का गठन किया है।

बुधवार को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त को उपाध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास, पशुपालन डेयरी विकास, सहकारिता, जल संसाधन, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग/सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर/राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर/ नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर, राज्य प्रतिनिधि नाबार्ड मध्यप्रदेश भोपाल और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति कन्वेनर मध्यप्रदेश भोपाल सदस्य होंगे।

समिति के दायित्व एवं कार्य अंतर्गत समिति योजना के क्रियान्वयन की प्रभावी समीक्षा करेगी। सभी संबंद्ध विभागों के बीच योजनाओं का अभिसरण एवं जिलों को समय पर बजट आवंटन कराया जाएगा। चयनित जिलों में सभी क्रियान्वित एजेंसियों को पर्याप्त सहायता प्रदान की जायेगी। योजनांतर्गत चयनित जिलों में मैदानी स्तर पर सभी संबंद्ध विभागों के अमले के पद भरे जाने और समय पर बजट जारी किये जाने की समीक्षा, प्रत्येक जिले की वार्षिक कार्ययोजना (एनुअल एक्शन प्लान) में सभी विभागीय वार्षिक योजनाओं को शामिल कराना, जिला योजनाओं में इनपुट के अलावा, विपणन और मूल्यवर्धन पहलुओं को भी शामिल किया जाना एवं प्रदेश के चयनित 8 जिलों के उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन में विशेष रूप से सहयोग प्रदान करना और योजना दिशा-निर्देशानुसार अन्य संबंधित कार्य भी करेगी।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारत औद्योगिक विकास योजना क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित

इसी तरह भारत औद्योगिक विकास योजना में प्रस्तावित परियोजनाओं के मूल्यांकन, अनुशंसा तथा योजना के प्रभावी एवं सुचारू क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। योजना वर्ष 2031-32 तक प्रभावशील रहेगी। योजना का उद्देश्य देश में निवेश के लिए तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना का विकास करना है, जिससे विनिर्माण क्षमता में वृद्धि एवं निवेश को प्रोत्साहन प्राप्त हों सके।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव जल संसाधन, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, नगरीय विकास एवं आवास, ऊर्जा, पर्यावरण, वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, राजस्व,वाणिज्यिक कर, वन और उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग, भारत सरकार द्वारा नामांकित अधिकारी सदस्य होंगे। प्रबंध संचालक एमपी.आई.डी.सी लिमिटेड,भोपाल को सदस्य-सचिव नामित किया गया है।

राज्य स्तरीय समिति द्वारा योजना के दिशा-निर्देशों में वर्णित दायित्वों का निर्वहन किया जाएगा तथा समय-समय पर डीपीआइआइटी, भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार अन्य आवश्यक कार्यवाही भी की जाएगी।

जेंडर रेस्पोंसिव बजट की समीक्षा और निगरानी के लिए अंतर्विभागीय समिति का गठन

वहीं, राज्य शासन द्वारा जेंडर रेस्पोंसिव बजट की राज्य स्तर पर समीक्षा एवं निगरानी के लिए अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव महिला एवं बाल विकास की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, वि.क.स. सह-सदस्य सचिव योजना आयोग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास और अन्य आमंत्रित विभाग के प्रतिनिधि/सलाहकार सदस्य होंगे।

समिति द्वारा विभागों में जेंडर बजट स्टेटमेंट, विभागीय अमले की प्रशिक्षण/क्षमतावर्धन की स्थिति, जेंडर रेस्पोंसिव बजट तैयार करने वाले विभागों के लिए सुझाव एवं समीक्षा, जेंडर अवेयरनेस आदि से संबंधित विषयों की त्रैमासिक समीक्षा और विभाग प्रस्तावित नवीन योजनाओं/अशासकीय संस्थाओं/ संस्थाओं से जेंडर बजटिंग के लिए संभावनाएं जैसे विषयों की समीक्षा एवं निगरानी की जायेगी। समिति प्रत्येक त्रैमास में समीक्षा बैठक आयोजित कर अपना प्रतिवेदन मुख्य सचिव को प्रस्तुत करेगी। समिति के अध्यक्ष को किसी भी विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव या विभागाध्यक्ष को बैठकों में आमंत्रित करने का अधिकार होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर