मप्र में स्वामित्व योजना में अब तक हुई 1 लाख 60 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां

 


- सभी 55 जिलों में मिल रहे ग्रामीणों को स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज

भोपाल, 21 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के स्वामित्व संबंधी वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर जारी है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में अब तक कुल 1 लाख 60 हजार 230 रजिस्ट्रियां पूर्ण की जा चुकी हैं।

जनसम्पर्क अधिकारी जूही श्रीवस्तव ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों के स्वामित्व संबंधी अभिलेख तैयार कर पात्र हितग्राहियों को उनकी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण पत्र सौंपा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सभी 55 जिलों में ग्रामीणों को स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज प्रदान किए जा रहे है। स्वामित्व योजना में अब तक छिंदवाड़ा जिला 8,530 रजिस्ट्रियां पूर्ण कर प्रदेश मे शीर्ष पर है। इसके बाद रीवा में 7,563, सागर में 7,289, राजगढ़ में 6,285, छतरपुर में 6,128, नरसिंहपुर में 6,042, सतना में 5,620, शिवपुरी में 5,131, विदिशा में 4,850, सिवनी में 4,736, जबलपुर में 4,269 और ग्वालियर में 3,925 रजिस्ट्रियां पूर्ण हो चुकी हैं।

बैतूल में 3,864, मंदसौर में 3,831, मंडला में 3,636, नर्मदापुरम में 3,624, सीहोर में 3,534, रायसेन में 3,159, कटनी में 2,971, बालाघाट में 2,913, गुना में 2,883, नीमच में 2,786, धार में 2,777, उज्जैन में 2,725, मैहर में 2,634, डिंडोरी में 2,534, मुरैना में 2,521, खंडवा में 2,370, श्योपुर में 2,354, बड़वानी में 2,339, टीकमगढ़ में 2,321, हरदा में 2,237, शाजापुर में 2,012, देवास में 1,987, दमोह में 1,873, खरगोन में 1,843 और आगर-मालवा में 1,755 रजिस्ट्रियां दर्ज की गई हैं।

इसके अतिरिक्त सीधी में 1,738, दतिया में 1,608, भिंड में 1,561, झाबुआ में 1,538, निवाड़ी में 1,493, बुरहानपुर में 1,308, पन्ना में 1,278, शहडोल में 1,257, रतलाम में 1,122, भोपाल में 967, उमरिया में 903, इंदौर में 883, अनूपपुर में 853, आलीराजपुर में 786, मऊगंज में 689 और पांढुर्णा में 666 रजिस्ट्रियां पूर्ण की जा चुकी हैं।

ग्रामीणों को मिला संपत्ति का वैधानिक अधिकार और वित्तीय सशक्तिकरण का आधार

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित मकानों और भूखंडों का आधुनिक ड्रोन तकनीक के माध्यम से सटीक सर्वेक्षण किया जाता है, जिसके आधार पर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार होते हैं। इन अभिलेखों के आधार पर पात्र ग्रामीणों को स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का स्पष्ट कानूनी अधिकार प्राप्त होता है, जो बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।

डिजिटल तकनीक से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया हुई सुगम

उन्होंने बताया कि योजना के पारदर्शी और तीव्र क्रियान्वयन के लिए ‘सारा ऐप’ और ‘संपदा 2.0’ जैसे डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के प्रयोग से संपत्ति संबंधी अभिलेखों के संधारण, पंजीयन और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और सुगम बन गई है। यह व्यवस्था न केवल ग्रामीणों को उनकी अचल संपत्ति के दस्तावेज सुरक्षित रूप से उपलब्ध करा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके वित्तीय सशक्तिकरण को भी गति दे रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर