मप्र में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार

 


- आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दुग्ध उत्पादों में मिलावट की जांच

भोपाल, 28 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नागरिकों को घर में आने वाले दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ताओं के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी।

जनसम्पर्क अधिकारी सुनील वर्मा ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनवाई गई है।

शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य

उन्होंने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है।

12.40 करोड़ की लागत, एनबीएल और एफएसएसएआई से मिलेगी मान्यता

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' (एनपीडीडी) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी।

100 से अधिक मानकों पर होगी जांच

प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी।

आमजन और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ

इस सुविधा का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आएगा, शुद्धता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर