मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग ने की वृहद जनसुनवाई, सुलझाए 28 गंभीर मामले
भोपाल, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और पारिवारिक विवादों के निपटारे की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए सोमवार को राजधानी भोपाल में एक वृहद जनसुनवाई का आयोजन किया।
जनसुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष आए कुल 28 गंभीर मामलों की सुनवाई करते हुए कई परिवारों को टूटने से बचाया गया, तो वहीं कुछ जटिल मामलों में कड़े निर्देश भी जारी किए गए। इस उच्च स्तरीय जनसुनवाई में आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव, सदस्य श्रीमती साधना स्थापक एवं सचिव सुरेश तोमर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
घरेलू हिंसा से लेकर साइबर अपराधों पर त्वरित कानूनी कार्यवाही के दिये निर्देश
जनसुनवाई के दौरान आयोग के सामने घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर प्रताड़ना, गंभीर पारिवारिक विवाद और वर्तमान समय में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से जुड़े मामले प्रमुखता से आए। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और पक्ष अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुने। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश और त्वरित कानूनी कार्यवाही के आदेश दिए गए।
आपसी संवाद से घरेलू मतभेद सुलझाने की दी सलाह
इस जनसुनवाई में आयोग का मानवीय और मार्गदर्शक चेहरा भी सामने आया। एक पारिवारिक विवाद के मामले में, जहां आवेदिका ने अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, आयोग की बेंच ने दोनों पक्षों की गहन काउंसलिंग की। विस्तृत चर्चा और समझाइश के बाद पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया और महिला ने खुशी-खुशी अपनी शिकायत वापस ले ली। वहीं एक अन्य मामले में, जहां पत्नी पति के साथ रहने को तैयार थी लेकिन पति विभिन्न आरोप लगाकर मना कर रहा था, आयोग ने दोनों को आपसी संवाद के जरिए मतभेद सुलझाने की सलाह देते हुए मामले में उचित कानूनी रुख अपनाने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में एक ऐसा अनोखा और गंभीर मामला भी सामने आया, जिसने सभी को चौंका दिया। एक पारिवारिक विवाद में शिकायतकर्ता (पत्नी) खुद अनुपस्थित रही, जबकि उसका पति आयोग के समक्ष पेश हुआ। पति ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उनकी शादी को 18 साल हो चुके हैं, लेकिन जब से उसकी पत्नी शासकीय सेवा में 'अधिकारी' के पद पर नियुक्त हुई है, उसने साथ रहने से इनकार कर दिया है। पति का आरोप है कि वह झूठे आरोप लगाकर अलग रह रही है और बात तक करने को तैयार नहीं है।
इस मामले की गंभीरता और आवेदिका की अनुपस्थिति को देखते हुए अध्यक्ष यादव ने निर्देश जारी किए हैं कि आगामी जनसुनवाई में आवेदिका (महिला अधिकारी) और अनावेदक (पति) दोनों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय किया जा सके।
न्याय प्रक्रिया को गति देने का संकल्प
आयोग की अध्यक्ष यादव ने कहा कि महिला आयोग हर पीड़ित महिला को न्याय दिलाने और परिवारों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी पक्ष द्वारा मंच का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत