भोपाल में जलसा-ए-शहादत में लगे अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे, पैरों से कुचले ट्रंप के पोस्टर
भोपाल, 07 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में आयोजित जलसा-ए-शहादत कार्यक्रम में इजराइल मुर्दाबाद और अमेरिका मुर्दाबाद के जोरदार नारे लगाए गए। इस दौरान कुछ लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जमीन पर रखकर पैरों तले कुचल दिए।
दरअसल, भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र की बिस्मिल्लाह कॉलोनी स्थित गरीब नवाज मस्जिद में शुक्रवार की रात जलसा-ए-शहादत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मौलाना रजी-उल-हसन हैदरी ने कहा कि आज दुनिया की जालिम ताकतें मासूमों और मजलूमों का खून बहा रही हैं। इजराइल और अमेरिका जैसे देशों के हाथ निर्दोषों के खून से रंगे हुए हैं। भाषण के दौरान उन्होंने ट्रंप पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने नारेबाजी करते हुए इजराइल और अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।
मौलाना ने आगे कहा कि कुछ लोग भूखे रहकर भी शिक्षा हासिल करते हैं, जिससे उनकी सियासी और तकनीकी ताकत बढ़ती है। मुसलमानों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा, क्योंकि किसी भी समुदाय की प्रगति का आधार शिक्षा ही है। उन्होंने 1979 के ईरानी इंकलाब का जिक्र करते हुए कहा कि वहां शिक्षा पर जोर देने से आज सुपर पावर भी ईरान से डरती हैं। नौजवानों से उन्होंने शिक्षा प्राप्त कर समाज को मजबूत बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने कहा कि दुनिया भर में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, इसका मुख्य कारण हमारी आपसी बंटवारा और एकता की कमी है। अकीदे अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इस्लाम, कुरान और रसूल सबके लिए एक हैं। नमाज के तरीके अलग हैं, लेकिन हमें आपस में लड़ने के बजाय एकजुट होना चाहिए। उन्होंने खामनेई को मर्द-ए-मुजाहिद बताया, जो सुपर पावरों के सामने अडिग खड़े रहे। रिजवी ने कहा जालिम के खिलाफ खड़े होने वाले के साथ अल्लाह होता है, और दुनिया किसी की शहादत कर सकती है, लेकिन उसके मकसद को खत्म नहीं कर सकती।
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने कहा कि यह पूरे आलम के लिए गहरे गम और सदमे की बात है कि एक ऐसा काइद हमसे रुखसत हो गया, जिसने पूरी उम्मत को इत्तेहाद और इत्तेफाक का पैगाम दिया। सैयद अली खामनेई ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने हमेशा जालिम ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई और मजलूमों का साथ दिया। उनकी जिंदगी और उनका पैगाम आने वाली नस्लों के लिए भी मिसाल रहेगा। कार्यक्रम के अंत में लोगों ने आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर