शहडोल: कच्चे मकान में लगी आग, मां के सामने जिंदा जल गया बेटा, मदद के लिए चिल्लाती रही महिला
शहडोल, 17 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहडाेल जिले के ग्राम कठोतिया में शनिवार तड़के एक कच्चे मकान में लगी आग में 18 वर्षीय युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई। हादसे के वक्त उसकी मां घर में ही मौजूद थीं, लेकिन आग की भयावहता और बंद दरवाजे के कारण बेटे को बचा नहीं सकीं। मां की आंखों के सामने ही उनका इकलौता सहारा हमेशा के लिए छिन गया।
घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 3 बजे गीता पटेल (45)अपने मकान के एक कमरे में सो रही थीं, जबकि उनका बेटा अमित (18) दूसरे कमरे में सोया हुआ था। इसी दौरान अचानक घर में आग लग गई। लपटें उठती देख गीता जान बचाकर बाहर निकल आईं, लेकिन अमित अंदर ही फंसा रह गया। मां ने मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया, लेकिन उस समय गांव में अधिकतर लोग गहरी नींद में थे।
आग तेजी से अमित के कमरे तक पहुंच गई। वह मदद के लिए चिल्लाता रहा। मां ने पड़ोसियों को जगाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरा कमरा उसकी चपेट में आ गया। जब तक लोग मौके पर पहुंचे, तब तक अमित की मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक पूरा मकान और उसमें रखा सारा सामान जलकर राख हो चुका था। अमित का शव बुरी तरह झुलसा हुआ मिला, जिसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस कमरे में अमित सो रहा था, उसके ऊपर अटारी में सूखी घास रखी हुई थी, जिससे आग के तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल आग लगने के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। पहले ही टूट चुका था परिवार
अमित सब्जी बेचकर घर का खर्च चलाता था और मां का इकलौता सहारा था। परिवार पहले ही कई दुखद घटनाओं से गुजर चुका है। एक बेटा वर्षों पहले घर छोड़कर चला गया था, जबकि करीब 10 साल पहले पिता ने आत्महत्या कर ली थी। बेटे की मौत के बाद मां पूरी तरह बेसहारा हो गई हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। मृतक की मां गीता पटेल ने बताया कि अमित की तबीयत खराब थी, इसलिए वह दूसरे कमरे में अंदर से कुंडी लगाकर सो रहा था। गांव में कुत्ते-बिल्ली का डर रहता है, इसी कारण दरवाजा बंद किया गया था। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात गांव में बिजली नहीं थी, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ था। गीता पटेल का कहना है, “मैंने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की, धक्का भी दिया, लेकिन कुंडी अंदर से बंद थी। गीता पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बेटा न बीड़ी पीता था और न शराब किसी तरह का कोई नशा करता था। आग लगने का कारण अब तक समझ में नहीं आया है, लेकिन अगर गांव में बिजली होती तो शायद समय रहते मदद मिल जाती और बेटे की जान बच जाती। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे