मप्रः सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चंबल में रेत माफिया पर शिकंजा, परिवहन सचिव ने दिखावटी कार्रवाई पर मांगी रिपोर्ट
भोपाल/ग्वालियर, 29 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में अवैध रेत उत्खनन और उसके परिवहन को लेकर अब प्रदेश सरकार पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। उच्चतम न्यायालय की तीखी टिप्पणियों और हालिया सुनवाई के बाद परिवहन विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक में हलचल तेज हो गई है।
सरकार ने भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में परिवहन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए कई गंभीर खामियों को चिन्हित किया है। परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने शुक्रवार को इस संबंध में परिवहन आयुक्त उमेश जोगा को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से नाराजगी जताई है।
पत्र में कहा गया है कि जिन मामलों में नियमों के तहत वाहनों की जब्ती और राजसात की कार्रवाई होना चाहिए थी, वहां केवल शमन शुल्क लेकर वाहनों को छोड़ दिया गया। इसे नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही माना गया है।
दरअसल, गत 20 से 26 मई के बीच चंबल संभाग के जिलों में हुई कार्रवाई का ब्यौरा सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर सवाल उठे हैं। श्योपुर जिले में बिना नंबर प्लेट के संचालित 11 वाहनों पर कार्रवाई की गई, लेकिन इनमें से केवल एक जेसीबी मशीन को जब्त किया गया। बाकी वाहनों को सिर्फ जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया गया। अधिकारियों का यह रवैया अब जांच के घेरे में आ गया है।
मुरैना जिले में स्थिति और अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां बिना नंबर प्लेट चल रहे 12 ट्रैक्टरों और 54 मालवाहक वाहनों पर मोटरयान अधिनियम की धाराओं के तहत केवल शमन शुल्क लगाया गया। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि इन वाहनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। रिपोर्ट में दो ट्रैक्टर जब्त करने का उल्लेख जरूर किया गया, लेकिन उनका पूरा रिकॉर्ड और विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया, जिस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
भिंड जिले की कार्रवाई भी संतोषजनक नहीं मानी गई। यहां बिना नंबर प्लेट के चल रहे 28 वाहनों, जिनमें अधिकतर ट्रक शामिल थे, पर मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। कई मामलों में केवल 500 रुपये का शमन शुल्क लेकर कार्रवाई पूरी कर दी गई। प्रमुख सचिव ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती शुरू कर दी है। शासन ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले, फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग करने वाले, छेड़छाड़ किए गए नंबर प्लेट वाले अथवा बिना नंबर प्लेट संचालित सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, लोडर और उत्खनन मशीनों को तत्काल रोका जाए। ऐसे वाहनों को जब्त कर राजसात करने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया है। खनिज परिवहन मार्गों और संवेदनशील स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रतिदिन नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों और चालकों की सूची जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि संयुक्त कार्रवाई की जा सके।
चंबल क्षेत्र में निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए उप परिवहन आयुक्त किरण शर्मा की तैनाती मुख्यालय स्तर पर की गई है। वहीं परिवहन आयुक्त को स्वयं क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश जारी हुए हैं। मुरैना और आसपास के क्षेत्रों में कई जगहों पर अवैध रूप से जमा रेत के भंडार नष्ट किए गए हैं। बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध दस्तावेजों वाले वाहनों को रोककर जांच की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाएगा और अवैध उत्खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
इस संबंध में चंबल घड़ियाल केंद्र के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने कहा कि रेत माफिया पर कार्रवाई के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। खनन पर काफी हद तक लगाम लगी है, लेकिन माफिया के लोग स्थानीय हैं और चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। जहां प्रशासन चेकिंग करता है, वे उन रास्तों को छोड़कर अंदरूनी और दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करने लगते हैं। प्रशासन जल्द ही इन वैकल्पिक रास्तों को खोजकर उन्हें भी पूरी तरह नष्ट करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर