मध्य प्रदेश के तीन शासकीय महाविद्यालयों में आरंभ होगी संस्कृत की पढ़ाई
- भारतीय ज्ञान परम्परा का उच्च शिक्षा में समावेश और संस्कृत भाषा के अध्ययन को मिलेगा विस्तार : मंत्री परमार
भोपाल, 10 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार भारतीय ज्ञान परम्परा को उच्च शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार के निर्देश के अनुपालन में उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के तीन शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर संस्कृत विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है।
इसके अंतर्गत शासकीय कन्या महाविद्यालय, बासौदा जिला विदिशा, जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजालपुर जिला शाजापुर तथा शासकीय महाविद्यालय, सोयतकलां जिला आगर-मालवा में स्नातक स्तर पर संस्कृत विषय प्रारंभ किया जाएगा। इससे इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने निकटस्थ शासकीय महाविद्यालयों में संस्कृत के अध्ययन का अवसर मिलेगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को जारी आदेश के अनुसार तीनों महाविद्यालयों में संस्कृत विषय का संचालन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से किया जाएगा।
भारतीय ज्ञान परम्परा का उच्च शिक्षा में समावेश हमारी प्राथमिकता : मंत्री परमार
मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के अनुरूप प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय भाषाओं और भारतीय दृष्टि का समावेश किया जा रहा है। संस्कृत भारत की ज्ञान, चिंतन और संस्कृति की समृद्ध परम्परा की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा है। उच्च शिक्षा में संस्कृत के अध्ययन के अवसरों का विस्तार विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली ज्ञान परम्परा से जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल है।
मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के साथ ज्ञान, संस्कार, संस्कृति और नवाचार से समृद्ध करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्कृत सहित विविध भारतीय भाषाओं के अध्ययन का विस्तार विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने, भारतीय ज्ञान परम्परा से परिचित होने और उसके समकालीन संदर्भों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर