पैरामेडिकल विद्यार्थियों के हित में पंजीयन प्रक्रिया होगी और सरल : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
- मप्र सह-चिकित्सीय परिषद की 26वीं वार्षिक बैठक में विद्यार्थियों के हित में विभिन्न विषयों पर किया गया मंथन
भोपाल, 27 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि पैरामेडिकल विद्यार्थी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों के हितों की रक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा समयबद्ध शैक्षणिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पंजीयन एवं परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाकर विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत दी जाए, जिससे उनका शैक्षणिक सत्र और भविष्य प्रभावित न हो।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल सोमवार को मंत्रालय में मध्य प्रदेश सह-चिकित्सीय परिषद की 26वीं वार्षिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त धनराजू एस., संचालक मनोज सरियाम, परिषद सदस्य डॉ. बीनू सिंह, रजिस्ट्रार डॉ. शैलोज जोशी, डिप्टी रजिस्ट्रार अंकित श्रीवास्तव सहित परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों से जुड़े विद्यार्थियों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक समस्याओं, पंजीयन व्यवस्था, परीक्षा एवं परिणामों की समयबद्धता सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं निर्धारित समय-सीमा में आयोजित हों तथा परीक्षा परिणाम भी समय पर घोषित किए जाएं। बैठक में परिषद की पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं छात्र हितैषी बनाने के महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
इस अवसर पर अन्य राज्यों से पंजीकृत पैरामेडिकल विद्यार्थियों के लिए मध्य प्रदेश में पंजीयन के लिए एनओसी की अनिवार्यता समाप्त करने, स्व-घोषणा एवं आधार आधारित ई-हस्ताक्षर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने तथा दस्तावेजों के सत्यापन को अधिक व्यवस्थित करने पर विमर्श हुआ एवं आवश्यक व्यवस्थाओं के निर्देश दिए गये।
बैठक में बताया गया कि मध्य प्रदेश के मान्यता प्राप्त संस्थानों से उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए भी ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, जिससे कम दस्तावेजों के साथ शीघ्र पंजीयन संभव हो सकेगा। बैठक में अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण ऑनलाइन आवेदनों के समयबद्ध निराकरण तथा डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्रों में क्यूआर (QR) कोड आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू करने पर भी सहमति बनी।
बैठक में परिषद के कार्य निष्पादन एवं सेवा प्रदाय व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि परिषद वर्ष 2017 से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 11 ऑनलाइन सेवाओं का संचालन कर रही है। जुलाई 2026 तक सामान्य एवं तत्काल पंजीयन, पंजीयन नवीनीकरण, एनओसी, माइग्रेशन, डुप्लीकेट पंजीयन, अंकसूची एवं अन्य सेवाओं के एक लाख से अधिक आवेदनों का समयबद्ध निराकरण किया गया है। अधिकांश सेवाओं में निराकरण की दर 95 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि कई सेवाओं में यह 99 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। परिषद द्वारा संचालित कम्युनिकेशन सेल/हेल्पडेस्क के माध्यम से भी विद्यार्थियों एवं सह-चिकित्सीय पेशेवरों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
बैठक में शैक्षणिक सत्रों के दौरान संस्थानों की मान्यता संबंधी प्रगति की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2025-26 में प्राप्त आवेदनों के आधार पर 211 संस्थानों को मान्यता प्रदान की गई है, जबकि निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई है। परिषद की गतिविधियों, छात्र हित में किए जा रहे सुधारों, पंजीयन प्रक्रिया के सरलीकरण, ऑनलाइन सेवाओं, संस्थानों की मान्यता तथा सेवा प्रदाय व्यवस्था की विस्तृत जानकारी रजिस्ट्रार डॉ. शैलोज जोशी ने प्रस्तुत की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर