मप्र के रतलाम में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर ग्रामीणों ने किया पथराव, 3 पुलिसकर्मी घायल
- पुलिस ने आंसू गैस छोड़ भीड़ को खदेड़ा, भारी पुलिस बल तैनात
रतलाम, 12 जून (हि.स.)। प्रदेश मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। इस घटना में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इनमें शामिल एक महिला पुलिसकर्मी का सिर फूट गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। घायल पुलिसकर्मियों में पवन कुमार, राजेंद्र बारोठ और शर्मीला जमरा शामिल हैं। पत्थर लगने से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शाम को एसपी अमित कुमार, एएसपी विवेक कुमार लाल और सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया पुलिसकर्मियों से मिलने मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
पुलिस के अनुसार, पलसोड़ी सहित आसपास के चार-पांच गांवों की करीब 1700 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित निवेश क्षेत्र में शामिल की गई है। ग्रामीण लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परियोजना से कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र प्रभावित होंगे तथा विस्थापन का सामना करना पड़ेगा।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंचे। उनके साथ जेसीबी, बुलडोजर और अन्य मशीनें थीं। कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर विरोध करने लगे। अधिकारियों ने पहले ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने 15 से 20 लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। पत्थरबाजी से अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए शहर एसडीएम आर्ची हरित, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, आरआई विक्की ठाकुर और 10 पटवारी मौजूद थे। पुलिस व्यवस्था की कमान सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के हाथ में थी। इमरजेंसी से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी तैनात थीं।
प्रस्तावित निवेश क्षेत्र को लेकर अप्रैल में भी बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। आंदोलन को बीएपी पार्टी, जयस और विभिन्न आदिवासी संगठनों का समर्थन मिला था। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना उनकी जमीन और घरों को प्रभावित करेगी, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि यह क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। इसी टकराव के बीच शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हिंसक झड़प में बदल गई और पलसोड़ी एक बार फिर प्रदेश की सुर्खियों में आ गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर