पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता: डीजीपी कैलाश मकवाणा
- राज्यस्तरीय संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री एवं पुलिस कल्याण समिति की वार्षिक बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
भोपाल, 02 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस एक अनुशासित वर्दीधारी संगठन है। इसकी कार्यक्षमता और मनोबल बनाए रखने के लिए अनुशासन के साथ पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के कल्याण पर ध्यान देना भी आवश्यक है। पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, पारिवारिक संतुष्टि और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का समय पर समाधान संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
डीजीपी मकवाणा सोमवार को पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों के कल्याण, सेवा सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों में निरंतर सुधार के उद्देश्य से आयोजित राज्य संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री समिति एवं पुलिस कल्याण समिति की वार्षिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित बैठक में पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों से जुड़े विभिन्न कल्याणकारी विषयों पर विचार-विमर्श किया गया तथा आवश्यक निर्णय लिए गए।
बैठक की शुरुआत देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप पुरी के कर्तव्य निर्वहन के दौरान गत रात्रि हुए आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त कर की गई। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बैठक में डीजीपी मकवाणा ने ने बताया कि पिछली बैठक में लिए गए अधिकांश निर्णयों का क्रियान्वयन किया जा चुका है। उन्होंने इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों तक समय पर पहुंचे और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए।
पुलिसकर्मियों और परिवारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण रखने के निर्देश
उन्होंने सभी इकाई प्रमुखों को नियमित जनसुनवाई आयोजित करने, शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने तथा आम नागरिकों एवं अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील एवं अच्छा व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आकस्मिक परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने में अनावश्यक दस्तावेजी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। बीमा दावों एवं अन्य लाभों से संबंधित मामलों की इकाई स्तर पर नियमित निगरानी करते हुए परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
डीजीपी ने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से समझकर संस्थागत स्तर पर समाधान के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र के प्रस्ताव की सराहना की। साथ ही हार्टफुलनेस संस्था के सहयोग से संचालित ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य सत्रों की नियमित समीक्षा तथा योग, आसन एवं प्राणायाम जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
डीजीपी मकवाणा ने दिशा लर्निंग सेंटर की उपयोगिता बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि इन केंद्रों को केवल पुस्तकालय तक सीमित न रखते हुए पुलिस परिवारों के बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाए। आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ शिक्षकों को सीमित अवधि के लिए आमंत्रित करने, ऑनलाइन कोचिंग का अधिकतम उपयोग करने तथा इकाई स्तर पर बच्चों की मांग के अनुसार विशेष कक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रों में पर्याप्त स्थान, बेहतर इंटरनेट सुविधा और अध्ययन के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। अधिकारियों से केंद्रों के संचालन, बच्चों की सहभागिता, उपलब्ध संसाधनों और व्यावहारिक समस्याओं के संबंध में सुझाव भी आमंत्रित किए गए।
भर्ती, पदोन्नति और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार की जानकारी
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और कार्यभार कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 एवं 2026 यानी दो वर्षों में लगभग 19 से 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण/जारी है। आठ वर्ष के अंतराल के बाद उप निरीक्षक एवं सूबेदार संवर्ग की भर्ती कर उनका प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा चुका है तथा कांस्टेबल चालक के 1,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया की जा रही है।
उन्होंने बताया कि विभिन्न संवर्गों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मामलों में तेजी लाते हुए लगभग 28 हजार पुलिसकर्मियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का भी संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया गया है। ईएचआरएमएस के अंतर्गत लीव मॉड्यूल प्रारंभ होने से अवकाश आवेदन एवं स्वीकृति की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है।
कानून-व्यवस्था एवं अभियानों में पुलिस के योगदान की सराहना
मकवाणा ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन, संवेदनशील परिस्थितियों के प्रभावी प्रबंधन तथा विभिन्न अभियानों में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि गत वर्ष मध्यप्रदेश पुलिस ने 14 हजार से अधिक बालिकाओं को खोजने में सफलता प्राप्त की, जो किसी भी एक वर्ष में बालिकाओं की खोज का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उन्होंने नक्सल उन्मूलन की दिशा में पुलिस बल द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की तथा अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान किए गए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का उल्लेख किया। नशामुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में जनजागरूकता एवं प्रवर्तन गतिविधियों को निरंतर प्रभावी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में पुलिसकर्मियों एवं उनके आश्रित परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2025 की राज्य स्तरीय संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री वार्षिक बैठक के निर्णय के अनुसार परोपकार निधि से दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि एक लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जा चुकी है।
बैठक में पुलिस सैलरी पैकेज योजना के अंतर्गत विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। डीजीपी ने निर्देश दिए कि पात्र पुलिसकर्मियों के वेतन खातों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पीएसपी श्रेणी में पंजीकरण हो तथा पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों को उपलब्ध बीमा लाभों की पर्याप्त जानकारी दी जाए। बैठक में पुलिस मुख्यालय स्तर पर संचालित कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई। शिक्षा निधि के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1,694 पुलिसकर्मियों के बच्चों को लगभग 5 करोड़ 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। शिक्षा निधि से जुड़े लगभग 1 लाख 26 हजार अंशदाताओं के परिवारों के 1,701 लाभार्थियों को लगभग 5 करोड़ 24 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर