जो व्यक्ति अपने शिष्य को भगवान शिव और परमात्मा से जोड़ दे, वही सच्चा गुरु : पंडित प्रदीप मिश्रा

 




- कुबेरेश्वरधाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

सीहोर, 27 जुलाई (हि.स.)। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गुरु बाजार में मिलने वाली वस्तु नहीं, बल्कि विश्वास और भरोसे की मूर्ति होता है। गुरु और शिष्य का संबंध केवल आस्था और विश्वास पर टिका होता है। सादगी के साथ जो व्यक्ति अपने शिष्य को भगवान शिव और परमात्मा से जोड़ दे, वही सच्चा गुरु कहलाने योग्य है।

पंडित प्रदीप मिश्रा मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सोमवार को शिव महापुराण कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे विश्व में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरु अपने शिष्यों को स्मरण करते हैं और शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है, क्योंकि वही मनुष्य को सत्य और ईश्वर के मार्ग पर चलना सिखाता है।

कुबेरेश्वरधाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं शिव महापुराण कथा के चौथे दिन सोमवार को भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा, जिसके लिए श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है। यहां पर आने वाले लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के लिए यहां पर भोजन-प्रसादी और पेयजल आदि की व्यवस्था की गई है।

मर्यादित भाषा में हो विरोध

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध हमेशा मर्यादित भाषा और गरिमा के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का प्रधानमंत्री किसी भी दल का हो, उसके प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रयुक्त आपत्तिजनक भाषा को उन्होंने मर्यादा के विरुद्ध बताते हुए कहा कि असहमति भी सभ्य और संस्कारित तरीके से व्यक्त की जानी चाहिए।

धनवान नहीं, पुण्यवान बनने का प्रयास करें

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में धन कमाना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है पुण्य कमाना। अपने धन का एक भाग सेवा, परोपकार और धार्मिक कार्यों में लगाने से जीवन सार्थक बनता है। पुण्य की कमाई ही मनुष्य के साथ हर परिस्थिति में रहती है।

शिव की पंचायत का किया वर्णन

कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव की पंचायत का वर्णन करते हुए भगवान शिव, माता दुर्गा, भगवान हरि, श्रीगणेश और भगवान सूर्य के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन देवों का स्मरण जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

भक्ति की कोई उम्र नहीं होती

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान की भक्ति करने के लिए किसी विशेष आयु की आवश्यकता नहीं होती। जब भी मन में श्रद्धा जागृत हो जाए, उसी क्षण से भक्ति प्रारंभ हो जाती है। उन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, मीराबाई, कर्माबाई, तुकाराम, नामदेव और रामकृष्ण परमहंस जैसे महान भक्तों का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची भक्ति ही मनुष्य को ईश्वर के निकट पहुंचाती है।

कुबेरेश्वरधाम बना सेवा और समर्पण का महाकुंभ

कुबेरेश्वरधाम में इन दिनों सेवा का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां विदेशों से आए युवाओं, डॉक्टरों, इंजीनियरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, विद्यार्थियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के सेवादार पूरी निष्ठा के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं। कोई भोजन प्रसादी परोस रहा है, तो कोई जूठे बर्तन साफ कर रहा है और कोई परिसर की स्वच्छता बनाए रखने में लगा है।

उतना लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में अभियान

भोजन प्रसादी स्थल पर अन्न की बर्बादी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उतना लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में संदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं से आग्रह किया जा रहा है कि वे आवश्यकता अनुसार ही भोजन लें। यदि कोई श्रद्धालु भोजन छोड़ देता है तो सेवादार हाथ जोड़कर विनम्रता से अन्न की महत्ता बताते हुए उसे भोजन की बर्बादी न करने का आग्रह करते हैं।

लंदन से आए शिव कुमार कर रहे सेवा

लंदन से आए शिव कुमार ने बताया कि उनके पिता यूनाइटेड किंगडम में क्लास-1 अधिकारी हैं, लेकिन महादेव के दरबार में सभी समान हैं। वे श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन उठाने और सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके पूर्व जन्मों के पुण्य का फल है कि उन्हें कुबेरेश्वरधाम की चौखट पर सेवा का अवसर मिला। उन्होंने संकल्प लिया कि आगामी 25 अगस्त को आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा में वे भोजन प्रसादी का नि:शुल्क स्टॉल लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा करेंगे।

कांवड़ यात्रा में दिखावे से बचने की सलाह

सावन माह के आगमन को लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा में दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा और भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग अत्यधिक वजन के साथ कांवड़ उठाकर स्वयं को अनावश्यक कष्ट देते हैं। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए केवल श्रद्धा और भाव आवश्यक है। दो लोटा जल भी सच्चे मन से अर्पित किया जाए तो भगवान शिव उसे सहर्ष स्वीकार करते हैं। कठिन तप की अपेक्षा सरल और निष्कपट भक्ति अधिक फलदायी होती है।

विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मंगलवार को शिव महापुराण कथा का समापन होगा। कथा का आयोजन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक किया जाएगा। पिछले चार दिनों में कुबेरेश्वरधाम में लाखों श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समिति एवं जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, पेयजल, भोजन प्रसादी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की जा रही हैं। बुधवार को आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दीक्षा महोत्सव को लेकर कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और देशभर से भक्तों का आगमन लगातार जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर