‘विकसित मध्य प्रदेश’ के संकल्प के साथ बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में हुए आउटरीच कार्यक्रम
- जीसीसी, स्पेस-टेक, एवीजीसी-एक्सआर और ड्रोन विनिर्माण के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर हुई चर्चा
भोपाल, 21 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश को तकनीक एवं नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 19 से 21 अगस्त तक बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में तीन दिवसीय निवेश प्रोत्साहन आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), स्पेस-टेक, एवीजीसी-एक्सआर और ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों एवं विशेषज्ञों के साथ निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बेंगलुरु में जीसीसी और स्पेस-टेक पर मंथन
अभियान के पहले दिन 19 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल ने जीसीसी परामर्श संस्था एएनएसआर के केंद्र का भ्रमण किया। इस दौरान ‘90 दिनों में जीसीसी’ मॉडल का अध्ययन किया गया। मॉडल में इकाई की स्थापना, लीज, वैधानिक पंजीकरण, जीएसटी और प्रतिभाओं की भर्ती जैसी प्रक्रियाओं को समानांतर रूप से पूरा किया जाता है। एएनएसआर ने इंदौर में नई सुविधा स्थापित करने में रुचि व्यक्त की है। प्रस्तावित इकाई की शुरुआत किराए के परिसर से करने की योजना है।
‘टियर-2 मध्य प्रदेश में जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र का उद्भव’ विषय पर आयोजित राउंडटेबल में इंदौर और भोपाल की प्रतिभा एवं शैक्षणिक क्षमता को जीसीसी विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों ने मध्य प्रदेश को बेंगलुरु के ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के तहत पूरक केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। क्वेस कॉर्प और कारगिल सहित उद्योग प्रतिनिधियों ने फिनिशिंग स्कूल, उद्योग संगठनों के साथ सहयोग, त्वरित शासकीय स्वीकृतियों, जीसीसी नीति, वित्तीय प्रोत्साहन और एआई आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के सुझाव दिए।
इसी अवसर पर एवीजीसी क्षेत्र में इंदौर और भोपाल की प्रतिभाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। जापानी एनिमेशन स्टूडियोज की बढ़ती रुचि को देखते हुए राज्य में एवीजीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।स्पेस-टेक विजन फोरम में प्रस्तावित स्पेस-टेक क्लस्टर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत की गई। भोपाल स्थित इसरो की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी, राज्य का मजबूत होता रक्षा विनिर्माण आधार, मध्य प्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कुशल इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को निवेश की प्रमुख ताकत के रूप में रेखांकित किया गया। उपग्रह प्रणालियों, ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेस-टेक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सुविधाओं पर भी चर्चा हुई।
हैदराबाद में टी-हब मॉडल और जीसीसी कनेक्ट
दूसरे दिन 20 अगस्त को हैदराबाद में प्रतिनिधिमंडल ने देश के प्रमुख इनक्यूबेशन केंद्र टी-हब का भ्रमण किया। राज्य, अकादमिक संस्थानों और उद्योग के समन्वित मॉडल, प्रोग्राम आधारित इनक्यूबेशन तथा डीप-टेक और सस्टेनेबिलिटी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया। मध्य प्रदेश के इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए टी-हब के मॉडल को उपयोगी बताया गया।
‘एमपी जीसीसी कनेक्ट’ राउंडटेबल में इंदौर या भोपाल में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय जीसीसी को एंकर निवेशक के रूप में आकर्षित करने, निवेश प्रोत्साहनों की ऑनलाइन और स्वचालित प्रक्रिया विकसित करने तथा वरिष्ठ प्रतिभाओं के लिए वेतन आधारित प्रोत्साहन देने के सुझाव मिले। कर्मचारियों के स्थानांतरण को आसान बनाने के लिए बच्चों के स्कूल प्रवेश, जीवनसाथी के रोजगार और स्टाम्प ड्यूटी में छूट जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया गया।
प्रतिनिधियों ने 100 सीटों की क्षमता से शुरू होकर एक वर्ष में 1,000 सीटों तक विस्तार योग्य प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना विकसित करने, एग्री-प्रोसेसिंग, एफएंडबी, ईवी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने तथा एआई कौशल विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाने के सुझाव दिए।
मुंबई में ड्रोन विनिर्माण और सिंहस्थ-2028 के लिए सहयोग
आउटरीच के अंतिम दिन शुक्रवार को मुंबई में ड्रोन एवं यूएवी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आइडियाफोर्ज के साथ चर्चा हुई। राज्य में ड्रोन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित परीक्षण क्षेत्र और विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
राज्य सरकार ने कॉमन फैसिलिटीज, टेस्ट रेंज और सर्टिफिकेशन सपोर्ट से युक्त समर्पित ड्रोन विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की योजना प्रस्तुत की। आइडियाफोर्ज ने मध्यप्रदेश में इकाई स्थापित करने में रुचि व्यक्त की है। कंपनी की तकनीकी टीम शीघ्र ही संभावित स्थल के मूल्यांकन के लिए मध्यप्रदेश का दौरा करेगी।सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए ड्रोन आधारित भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी, यातायात प्रबंधन और इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। संबंधित विभागों द्वारा पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।
निवेश प्रस्तावों को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा
तीन दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम से मध्यप्रदेश में जीसीसी, स्पेस-टेक, एवीजीसी-एक्सआर और ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र में निवेश एवं साझेदारी की नई संभावनाएं सामने आई हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंदौर में ANSR की प्रस्तावित इकाई, एवीजीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्पेस-टेक क्लस्टर की DPR को अंतिम रूप देने तथा आइडियाफोर्ज के स्थल मूल्यांकन और सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित सहयोग को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। इससे प्रदेश में तकनीकी निवेश, रोजगार और उच्च कौशल वाली प्रतिभाओं के लिए नए अवसर विकसित होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर