मप्रः कोसमी में मकान-खेत उजड़ने पर भड़का आक्रोश, 5,000 आदिवासियों का भोपाल कूच
- केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिह चौहान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल, सौंपा ज्ञापन
भोपाल, 15 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़ने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। आसपास के गांवों से पांच हजार से ज्यादा आदिवासी भोपाल की ओर पैदल कूच कर रहे हैं। गुरुवार रात उनका जत्था कोनाझिर में रुका है। ये आदिवासी 17 अक्टूबर को भोपाल में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाएंगे। पट्टे की मांग करेंगे।
इसी बीच गुरुवार की रात केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल, बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव सहित अनुसूचित जनजाति समुदाय के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी ग्राम में बीते दिनों हुए घटनाक्रम की जानकारी देकर जनजातीय समुदाय के साथ हुई कार्यवाही की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जा रही है। सबके साथ न्याय होगा। उन्होंने कहा कि हम आपसी संवाद से मामले का व्यावहारिक समाधान निकालेंगे।
ग्राम कोसमी में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई में 12 परिवारों के मकान तोड़ दिए गए थे, साथ ही फसलों को कुचल दिया गया था। इसके बाद गांव में लगातार धरना चला। आदिवासियों के मकान तोड़े जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतिहा हुई है। बच्चों की चीखें और महिलाओं की कराह सुनी है। मासूमों को बिलखते देखा है।
कोसमी गांव में मकान तोड़े जाने के विरोध में पांच दिन तक धरना देने के बाद आदिवासी विरोध में उतरे हैं। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि मकानों और खेती की जमीन पर कार्रवाई ने उनके सामने रहने, खाने और आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। अब यह विरोध केवल कोसमी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दूसरे गांवों के आदिवासी भी एकजुट होकर न्याय की मांग उठा रहे हैं।
वन विकास निगम की कार्रवाई के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के हजारों आदिवासी न्याय की मांग लेकर भोपाल की ओर पदयात्रा कर रहे हैं। पदयात्रा में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हैं। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा में डीजे वाहन भी शामिल होने की जानकारी है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल मौजूद है।
आंदोलनकारियों का ऐलान है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाएंगे। उनकी मांग है कि बेदखल परिवारों को जमीन का पट्टा, उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए तथा कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपने कब्जे और खेती से संबंधित पुराने दस्तावेज रखेंगे तथा मांग करेंगे कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर