चीन में बिजली-श्रम की लागत बढ़ने से भारत के निर्माताओं के लिए बना विश्व बाजार में बड़ा अवसरः काश्यप
- मप्र एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव 2026 में 800 से अधिक निर्यातकों और उद्यमियों ने लिया हिस्सा
भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि देश के कुल निर्यात में लगभग आधा हिस्सा एमएसएमई का है। चीन में बिजली, श्रम और अधोसंरचना की लागत बढ़ने से भारत के निर्माताओं के लिए विश्व बाजार में बड़ा अवसर बना है। इसका लाभ लेने के लिए उद्यमी उत्पादन का पैमाना और क्षमता बढ़ाएँ, जिससे प्रति इकाई लागत घटे।
मंत्री काश्यप गुरुवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्य प्रदेश एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित कर रहे थे। यह कन्वेंशन औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग और मप्र औद्योगिक विकास निगम द्वारा विदेश व्यापार महानिदेशालय और भारत व्यापार संवर्धन संगठन के साथ मिलकर आयोजित किया गया था।
कॉन्क्लेव में प्रदेश के 800 से अधिक निर्यातकों और उद्यमियों ने सहभागिता की। कॉन्क्लेव में तकनीकी सत्र, उद्घाटन सत्र, तीन पैनल चर्चाएँ, दो प्रेजेंटेशन और समापन पर फायरसाइड चर्चा हुई। परिसर में सात शासकीय संस्थाओं के और प्रदेश के ओडीओपी एवं जीआई उत्पादों के 14 स्टॉल लगाए गए।
एमएसएमई मंत्री काश्यप ने कहा कि यूके और यूरोपीय संघ के साथ समझौतों में परिधान पर जीरो शुल्क के लिए उत्पाद में भारतीय अंश अधिक होना आवश्यक है, और पीएम मित्र पार्क में फाइबर से कताई और बुनाई तक का पूरा काम होने से प्रदेश के परिधान निर्यातकों को इसका लाभ मिलेगा। मंत्री श्री काश्यप ने उद्योग संगठनों से कहा कि वे हर उद्योग की निर्यात संभावनाएँ खोजकर शासन के पास लाएँ, और आश्वासन दिया कि छोटे या बड़े किसी भी उद्योग का व्यापार बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव की आवश्यकता होगी, तो राज्य शासन वह भी करेगा।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने उद्योग को व्यापार समझौतों का लाभ लेने के गुर बताए। उन्होंने कहा कि सरकार समझौते से बाजार का रास्ता खोलती है, खरीददार तक पहुँचना गुणवत्ता और कीमत से तय होता है, और समझौता निर्यातक को प्रतिस्पर्धी से आगे निकलने की अतिरिक्त बढ़त देता है। उन्होंने एक लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के लिए उद्योग संगठनों को तीन कदम बताएः पहला, अपने क्षेत्र के कम से कम पाँच ऐसे उत्पाद चुनें जिनमें निर्यात की सबसे अधिक क्षमता है; दूसरा, इन उत्पादों के लिए एफटीए साझेदार देशों में सबसे संभावनाशील बाजार पहचानें; तीसरा, उन इकाइयों को चिन्हित करें जो इस स्तर तक निर्यात कर सकती हैं।
मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि उद्योग और शासन मिलकर काम करें, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तय एक लाख करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य एक वर्ष में प्राप्त किया जा सकता है। फार्मा उद्योग की समस्या पर उन्होंने जानकारी दी कि निर्यात आदेश मिलने पर औषधि लाइसेंस में उत्पाद जोड़ने की स्वीकृति में अब दो दिन से अधिक नहीं लगेंगे, और म.प्र. औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक को उद्योग संगठनों के साथ नियमित संवाद मंच बनाने के निर्देश दिए।
निर्यातकों के लिए पाँच व्यवस्थाओं का शुभारंभ
मंत्री काश्यप और मुख्य सचिव बर्णवाल ने कॉन्क्लेव में निर्यातकों के लिए पाँच व्यवस्थाओं का शुभारंभ किया। मध्य प्रदेश एफटीए कार्य योजना 2026-27 में सात उद्देश्यों के अंतर्गत 31 कार्य बिंदु हैं। निर्यातकों के लिए एफटीए हैंडबुक में हर उत्पाद के लिए समझौते का लाभ, उत्पत्ति का नियम और संपर्क की जानकारी है। एमपी ट्रेड पोर्टल के एफटीए मॉड्यूल पर निर्यातक अपना उत्पाद चुनकर हर समझौते में लगने वाला शुल्क देख सकते हैं। एफटीए एक्सेलेरेटर में चार क्षेत्रों की 80 निर्यात इकाइयों को सही समझौता चुनने, प्रमाणन और मूल्य निर्धारण से लेकर विदेशी खरीदारों से बैठक तक सहयोग किया जाएगा।
एफटीए का व्यावहारिक उपयोग विषय पर पहली पैनल चर्चा का संचालन आईएम ग्लोबल के सीईओ श्री रवि के. तिवारी ने किया। भारत व्यापार संवर्धन संगठन, इक्रियर, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान और हिंद फार्मा के विशेषज्ञों ने निर्यात खेप को कारखाने से विदेशी खरीदार तक ले जाकर एचएस कोड, उत्पत्ति के नियम, उत्पत्ति प्रमाण पत्र और खरीदार के मानकों तक की जानाकरी दी। कॉन्क्लेव में बताया गया कि शुल्क में छूट तभी मिलती है जब खरीदार उसका दावा करे, और उत्पत्ति का रिकॉर्ड निर्यातक को वर्षों तक रखना होता है।
मध्य प्रदेश का उद्योग और निर्यात लक्ष्य विषय पर दूसरी पैनल चर्चा का संचालन प्रतिभा सिंटेक्स के प्रबंध संचालक श्री श्रेयस्कर चौधरी ने किया। एलटी फूड्स, वीई कमर्शियल व्हीकल्स, श्रीजी पॉलिमर्स, फ्लेक्सिटफ वेंचर्स और सर्व फोम के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे व्यापार समझौतों के किन बाजारों में निर्यात बढ़ाएँगे और इसके लिए शासन से क्या सहायता करता है।
शासकीय संस्थाओं की भूमिका विषय पर तीसरी पैनल चर्चा का संचालन संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक अभिषेक शर्मा ने किया। ईसीजीसी, एक्ज़िम बैंक, कॉनकॉर, भारतीय डाक और परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के प्रतिनिधियों ने निर्यात ऋण, निर्यात बीमा, रेल माल परिवहन, डाक से निर्यात और परिषद की सहायता की जानकारी दी और उद्योग के प्रश्नों के उत्तर दिए। श्री शर्मा ने केंद्र के निर्यात संवर्धन मिशन पर प्रस्तुतीकरण भी दिया, और ट्रेड कनेक्ट पोर्टल की जानकारी दी गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सचिव जॉन किंग्सली ने कहा कि व्यापार में जानकारी की असमानता छोटे निर्यातक के सामने एक बड़ी चुनौती है: छोटे उद्यमी को अक्सर यह पता नहीं होता कि किस बाजार में उसके उत्पाद पर कितना शुल्क है और समझौते का लाभ कैसे लिया जाए। कॉन्क्लेव में प्रारंभ हुए हेल्पडेस्क, पोर्टल और एक्सेलेरेटर इसी कमी को दूर करने के लिए हैं, और विभाग मुख्य सचिव द्वारा बताई गई एक वर्ष की अवधि में लक्ष्य तक पहुँचने के लिए काम करेगा। वाणिज्य विभाग, भारत सरकार के संयुक्त सचिव उज्ज्वल कुमार घोष ने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजन प्रदेश के अन्य संभागों और जिलों में भी किए जाएँ। कॉन्क्लेव में एमडी एमपीआईडीसी चन्द्रमौली शुक्ला भी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर