समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को बराबरी का हक उपलब्ध करानाः प्रो. गोपाल शर्मा
- उच्च स्तरीय समिति की जन परामर्श बैठक सम्पन्न, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
ग्वालियर, 25 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गुरुवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जन परामर्श बैठक हुई, जिसमें समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि देश में वर्तमान में दो दर्जन से अधिक ऐसे कानून हैं जिसमें एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है।
बाल भवन के सभागार में आयोजित जन परामर्श बैठक में उच्च स्तरीय कमेटी के अनूप नायर, बुधपाल सिंह, शोभा पेठणकर सहित विधायकगण मोहन सिंह राठौर व साहब सिंह गुर्जर, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया, ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक शर्मा, संत कृपाल सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, पूर्व मंत्री इमरती देवी, भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत, कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उच्च स्तरीय समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता के संबंध में जनता के विचार जानने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। नागरिकों के विचार जानने के लिये प्रदेश भर में लोगों से संवाद करने के उद्देश्य से बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रदेश भर में 10 लाख से अधिक लोगों ने समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का संबंध परिवार से जुड़े कानूनों जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और परिवारिक अधिकारों से है। वर्तमान में देश में अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। इसी कारण समान परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।
समिति की सदस्य शोभा पेठणकर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का इतिहास काफी पुराना है। आजादी से पहले भी इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया था लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। देश ने उच्च स्तरीय समिति गठित कर नागरिकों के सुझाव लिए जा रहे हैं। इन सुझावों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट विधि विभाग को सौंपेगी। इसके पश्चात ही इस कानून का मसौदा तैयार किया जायेगा। ग्वालियर में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर इस बैठक में न केवल भाग लिया बल्कि अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
विधायक मोहन सिंह राठौर ने समान नागरिक संहिता के संबंध में कहा कि इसके लागू होने से सम्पूर्ण देश में सभी के लिये समान कानून मिलेगा और देश के विकास में यह कानून बहुत ही उपयोगी साबित होगा। समाज के सभी वर्गों से चर्चा कर कानून बनाने का जो कार्य किया जा रहा है, वह प्रशंसनीय है।
विधायक साहब सिंह गुर्जर ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लिये नागरिकों के जो सुझाव लिए जा रहे हैं। उनमें शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी सुझाव आमंत्रित किए जाना चाहिए। सम्पूर्ण देश में सभी के लिये एक जैसा कानून होना ही चाहिए।
संत कृपाल सिंह ने कहा कि सभी धर्म हमें समान व्यवहार और अधिकार देने की बात कहते हैं। देश में सभी नागरिकों के लिये एक जैसा कानून बनाने का जो कार्य किया जा रहा है, वह प्रशंसनीय है। कानूनों में एकरूपता, राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करेगी।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि ग्वालियर जिले में समान नागरिक संहिता के लिये विभिन्न माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी विभिन्न समूहों से चर्चा कर सुझाव प्राप्त किए गए हैं। ग्वालियर जिले में 35 हजार से अधिक नागरिकों ने समान नागरिक संहिता के संबंध में यह सुझाव दिए हैं। इनमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि देश में सभी के लिये समान कानून होना चाहिए। ज्यादातर कानून सभी के लिये एक समान हैं। लेकिन सामाजिक, पारिवारिक, विरासत एवं पारिवारिक मुद्दों में देश में अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग प्रावधान हैं। समान नागरिक संहिता के लागू होने से सभी के लिये समान कानून होगा और यह सभी के लिये अच्छा रहेगा।
उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों के समक्ष आयोजित हुई जन परामर्श बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। समिति के सदस्यों ने बैठक में प्राप्त सुझावों को एकत्र कर उन पर विचार करने की बात भी कही।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर