मप्र में बीते 24 साल में विश्वविद्यालयों की संख्या 13 से बढ़कर 81 और सरकारी कालेजों की संख्या 299 से बढ़कर 571 हुई
भोपाल, 18 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में बीते चौबीस वर्ष में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की संख्या 13 से बढ़कर 81 हो गई है। इसी अवधि में शासकीय महाविद्यालयों की संख्या 299 से बढ़कर 571 हो गयी है। इसी अवधि में महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश में लगभग 4.9 गुना वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2002 में प्रदेश 2 लाख 46 हजार 634 विद्यार्थियों में महाविद्यालयों में प्रवेश लिया था, वर्तमान वर्ष 9 लाख 64 हजार विद्यार्थियों ने महाविद्यालयों में प्रवेश लिया है।
जनसम्पर्क अधिकारी जूही श्रीवास्तव ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में मध्यप्रदेश में कुल 13 विश्वविद्यालय थे। इनमें 11 विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत तथा 2 विश्वविद्यालय अन्य विभागों के अंतर्गत थे। वर्तमान वर्ष 2026 में प्रदेश में कुल 81 विश्वविद्यालय हैं। इनमें 17 शासकीय और 54 निजी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत, जबकि 10 विश्वविद्यालय अन्य विभागों के अंतर्गत संचालित हैं। विश्वविद्यालयों की संख्या में यह विस्तार प्रदेश में उच्च शिक्षा के संस्थागत विकल्पों के व्यापक होने और विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के विविध अवसरों के बढ़ने को दर्शाता है।
2.46 लाख से बढ़कर 12.10 लाख हुए प्रवेश
उन्होंने बताया कि संस्थागत विस्तार के साथ विद्यार्थियों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। शैक्षणिक सत्र 2002-03 में प्रदेश में 2 लाख 46 हजार 634 विद्यार्थी प्रवेशित हुए थे। इसके 22 वर्ष बाद शैक्षणिक सत्र 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 12 लाख 10 हजार 635 हो गई। इस प्रकार इस कालखंड में 9 लाख 64 हजार 1 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया और प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या लगभग 4.9 गुना हुई। यह वृद्धि बताती है कि दीर्घकाल में उच्च शिक्षा के संस्थागत विस्तार के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी भी बढ़ी है।
वित्तीय निवेश लगभग 15 गुना बढ़ा
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा के संस्थागत विस्तार के साथ वित्तीय संसाधनों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2002-03 में उच्च शिक्षा विभाग का बजट प्रावधान ₹290.43 करोड़ था। वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर ₹4,296.91 करोड़ हो गया। इस प्रकार लगभग 24 वर्ष के इस कालखंड में बजट में ₹4,006.48 करोड़ की वृद्धि हुई और बजट प्रावधान लगभग 14.8 गुना हो गया। बजट में यह विस्तार उच्च शिक्षा की अधोसंरचना, शैक्षणिक सुविधाओं और संस्थागत क्षमता के विस्तार के लिए बढ़ते वित्तीय निवेश को दर्शाता है।
यह परिवर्तन केवल संख्या में वृद्धि तक सीमित नहीं है। शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विस्तार ने संस्थागत आधार को व्यापक किया, बढ़ती विद्यार्थी संख्या ने उच्च शिक्षा की बढ़ती पहुंच को रेखांकित किया, बजट में वृद्धि ने विकास के लिए संसाधनों का आधार मजबूत किया और ई-प्रवेश ने प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर