देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई शिक्षा नीति साकार करेगीः मंत्री इंदर सिंह परमार
- उच्च शिक्षा मंत्री ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का किया अनावरण
रीवा, 04 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक देश को विश्वगुरू बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री की पहल और प्रेरणा से सनातन परंपरा, भारतीय दर्शन और परंपरागत कौशल को समाहित करते हुए नई शिक्षा नीति का निर्माण किया गया है। मध्य प्रदेश में इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई शिक्षा नीति साकार करेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार शनिवार को रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित विचार संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार और दर्शन आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने सनातन, ज्ञान और धर्म की ध्वजा को पश्चिम के देशों में जाकर सफलतापूर्वक लहराया। स्वामी विवेकानंद के विचार भारतीय ज्ञान पंरपरा के ध्वजवाहक हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने पौधे रोपित करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
मंत्री परमार ने कहा कि भारत में हजारों साल से ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और धर्म का अपरिमित उत्कर्ष था। अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली ने हमारी सनातन हमारी शिक्षा पद्धति को नष्ट कर दिया। भारत पर प्राचीन काल से ही लगातार आक्रमण हुए। ये सभी आक्रमण देश के वैभव, संपन्नता और प्रचुर सम्पत्ति को लूटने के लिए हुए। देश पर आक्रमण करने वाले सिकंदर जैसे आक्रांताओं को महान कहने का इतिहास पढ़ाया गया, लेकिन देश के प्राचीन गौरव को भुला दिया गया। हमारी वसुधैव कुटुम्बकम की परंपरा को स्वामी विवेकानंद ने विश्वभर में स्थापित किया।
कार्यक्रम में विचारक चेतस सुखाड़िया ने कहा कि चार जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद परमात्मा के पास चले गए, लेकिन उनके विचार आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित कर रहे हैं। जब देश राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से पराधीन था तब स्वामी जी ने अमेरिका में जाकर भारतीय ज्ञान और दर्शन का ध्वज लहराया। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर लाखों युवाओं ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। स्वामी विवेकानंद के विचार ऐसे सूर्य हैं जो कभी अस्त नहीं होते हैं। स्वामी जी ने धर्म और ज्ञान को सामाजिक परिवर्तन और देश को जागृत करने का साधन बनाया।
समारोह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज तिवारी ने कहा कि हिन्दुत्व जीवन की पद्धति और विचारधारा है। स्वामी विवेकानंद के विचार युवा अपने मन में उतारकर सभी संशय दूर कर सकते हैं। नैतिक आधार पर ही शिक्षा कारगर होगी।
डॉ. अजय तिवारी ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर राजेन्द्र कुड़रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय में विवेकानंद विचार पीठ तथा ध्यान केन्द्र की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालय में इसी वर्ष से गुजराती और सिंधी का कोर्स आरंभ हो रहा है। उन्होंने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मंत्री परमार की अध्यक्षता में आयुर्वेद कालेज की बैठक संपन्न
रीवा के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की सामान्य सभा की बैठक कालेज के सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्च, तकनीकी शिक्षा तथा आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सामान्य सभा की बैठक समय पर आयोजित करें। स्वशासी महाविद्यालय का वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक प्रबंधन शासन के मापदण्डों के अनुसार करें। वर्ष 2026-27 में विभिन्न मदों में व्ययक की जाने वाली राशि के प्रस्ताव पहले कार्यकारिणी समिति से अनुमोदन कराने के बाद सामान्य सभा में प्रस्तुत करें।
मंत्री परमार ने कहा कि विन्ध्य में आयुष औषधियों का भण्डार है। आयुर्वेद कालेज और अस्पताल को निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर करें। नए कालेज भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजें। वर्तमान में जारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। कालेज के विकास से जुड़े प्रस्ताव तैयार करते समय उसमें सभी प्रावधानों को शामिल करें। कालेज के रिक्त पदों की पूर्ति की जाएगी।
बैठक में कालेज के प्राचार्य दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि कालेज की स्थापना 1973 में की गई थी। इसका संचालन स्वशासी रूप में किया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन लगभग दो सौ बाह्य रोगियों का उपचार किया जाता है। भारत सरकार से अनुदान प्राप्त दो रिसर्च प्रोजेक्ट वर्तमान में जारी हैं। कालेज में चार पीजी कोर्स शुरू करने तथा पीएचडी के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर