नव संवत्सर प्रकृति के नवसृजन का उत्सव; युवा पीढ़ी को वसुधैव कुटुंबकम् का बोध कराना जरूरी: कृष्णा गौर

 


भोपाल, 18 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश की पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि नव संवत्सर प्रकृति के नवसृजन का उत्सव है। युवा पीढ़ी को वसुधैव कुटुंबकम् का बोध कराना जरूरी है।

राज्यमंत्री कृष्णा गौर बुधवार देर शाम गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ पर नूतन वर्ष आरंभ उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पर संबोधित कर रही थीं। उन्होंने अपने संबोधन में हिंदू नववर्ष की वैज्ञानिकता, सनातन संस्कृति की महानता और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि ये वह समय है जब प्रकृति स्वयं नवजीवन का उत्सव मनाती है। हमारे ऋषियों ने नववर्ष का आरंभ उसी समय से किया जब प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है, जो हमारे सनातन ज्ञान की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दूरदर्शिता का अद्भुत उदाहरण है।

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि हमारी संस्कृति केवल मनुष्य नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण की भावना से प्रेरित है। हमारी संस्कृति में पीपल, तुलसी, नदी और सूर्य को पूजनीय माना गया है, जो प्रकृति, पशु-पक्षियों और समस्त जीवों के प्रति हमारी करुणा को दर्शाता है। यह केवल हमारी आस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की एक महान जीवन पद्धति है।

उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी आवश्यकता हमारी नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की है। युवाओं को गर्व के साथ यह बताना चाहिए कि वे उस महान सनातन परंपरा के वाहक हैं, जिसने पूरी दुनिया को “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश दिया।

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कार्यक्रम के आयोजकों को इस भव्य उत्सव के लिए बधाई दी। उन्होंने विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर पर सभी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को सहेजते हुए समाज में एकता, सेवा और संस्कार की ज्योति को और अधिक प्रज्ज्वलित करने का संकल्प दिलाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर