राष्ट्रीय वंदे मातरम् युवा शिविरः युवाओं को डिजिटल डिटॉक्स, नशामुक्ति, नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण पर मिला मार्गदर्शन
भोपाल, 14 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में आयोजित राष्ट्रीय वंदे मातरम् युवा शिविर 2026–27 के तीसरे दिन बुधवार को विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए गए। इनमें डिजिटल डिटॉक्स, नशामुक्ति, आध्यात्मिक जीवन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने युवाओं से संवाद किया।
मेरा युवा भारत, मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित इस शिविर में छह राज्यों से आए युवा प्रतिभागी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। बुधवार को दिन के प्रथम सत्र में ब्रह्माकुमारी, भोपाल की आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं आयुर्वेद चिकित्सक बी.के. डॉ. देवयानी ने युवाओं को नशामुक्ति और डिजिटल डिटॉक्स के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर आत्ममंथन करने का आह्वान करते हुए पूछा कि मोबाइल युवाओं के नियंत्रण में है या युवा स्वयं मोबाइल के नियंत्रण में हैं। उन्होंने मोबाइल नोटिफिकेशन सीमित करने, अनावश्यक डिजिटल सामग्री हटाने तथा एकाग्रता बढ़ाने वाली आदतें अपनाने की सलाह दी।
इसके बाद ब्रह्माकुमारी की आध्यात्मिक सेवाओं की समन्वयक बी.के. बहन हेमा ने आध्यात्मिकता और चेतना के विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने व्यक्ति के सहज स्वरूप और बाहरी परिस्थितियों से निर्मित व्यक्तित्व के बीच अंतर समझाते हुए युवाओं को आत्मचिंतन, सकारात्मकता और आंतरिक परिवर्तन के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र में नेतृत्व क्षमता, संघर्षों से उबरने, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें वनस्पति विज्ञान में हिंदी माध्यम से पीएचडी करने वाले प्रथम विद्वान एवं गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय, राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित आयकर अधिकारी राहुल, अधिवक्ता एवं युवा प्रेरक हर्षा हसवानी तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के सहायक निदेशक नवीन कुमार ने युवाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय ने अपने जीवन के संघर्षों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि असफलताएं सफलता की राह में महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती हैं। उन्होंने दूसरों की सहायता करने की भावना को युवाओं की महत्वपूर्ण पहचान बताते हुए प्रतिभागियों को निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। आयकर अधिकारी श्री राहुल ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन बनाए रखने और समय का सदुपयोग करने का संदेश दिया।
अधिवक्ता हर्षा हसवानी ने महिला सशक्तिकरण और अधिकारों पर चर्चा करते हुए सावित्रीबाई फुले के शैक्षिक योगदान को याद किया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, समान अवसरों तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित पोश अधिनियम की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
भारतीय खेल प्राधिकरण के सहायक निदेशक नवीन कुमार ने खेलों के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देने, युवा विकास और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने पर अपने विचार साझा किए। शिविर में शामिल छह राज्यों के युवाओं ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का परिचय दिया। हिमाचल प्रदेश के प्रतिभागियों ने पारंपरिक नाटी नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं उत्तर प्रदेश के युवाओं ने लोक नृत्यों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
राजस्थान के प्रतिभागियों ने प्रसिद्ध घूमर नृत्य के जरिए अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की, जबकि गुजरात के युवाओं के गरबा नृत्य ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। ओडिशा के युवाओं ने ओडिसी नृत्य और तमिलनाडु के प्रतिभागियों ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की भव्यता को मंच पर साकार किया।
राष्ट्रीय वंदे मातरम् युवा शिविर का समापन 18 अक्टूबर 2026 को समारोह, समूह छायाचित्र और प्रतिभागियों से फीडबैक प्राप्त करने के साथ होगा। शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को देश की गौरवशाली विरासत से जोड़ना, विविधता में एकता की भावना को सुदृढ़ करना तथा विकसित भारत @2047 के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर