मप्र मोबिलिटी विजन 2030: बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम में पीपीपी मॉडल को बढ़ावा
- पैनल डिस्कशन में विषय विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
भोपाल, 11 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय 'यात्री परिवहन विजन समिट 2026' में पहले दिन शुक्रवार को 08 महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए।
बस संचालन और आईटीएमएस में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप समिट का मुख्य केंद्र 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' योजना रही, जिसका उद्देश्य यात्री परिवहन व्यवस्था को सशक्त करना और निजी निवेश को गति देना है। सम्मेलन के पहले सत्र का विषय मध्य प्रदेश मोबिलिटी विजन 2030: बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) में सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा रहा।
इस सत्र में मध्य प्रदेश के विशाल भौगोलिक विस्तार और तेजी से विकसित होते शहरी केंद्रों को ध्यान में रखते हुए सेवा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि बस संचालन और आईटीएमएस तकनीक में पीपीपी मॉडल को लागू करने से न केवल वित्तीय व्यवहार्यता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव भी मिलेगा।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने कहा कि यात्री परिवहन विजन समिट 2026 मोबिलिटी क्रांतिका नया अध्याय है। यह समिट 2030 तक मध्यप्रदेश में आवागमन और परिवहन व्यवस्था को बेहतर, सुरक्षित, सुगम और आधुनिक बनाने की दीर्घकालीन योजना के लिये आयोजित की गई।
मध्य प्रदेश ने संपूर्ण राज्य में सार्वजनिक बस परिवहन को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं नागरिक-केंद्रित मोबिलिटी इकोसिस्टम में परिवर्तित करने हेतु मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा आगामी 25 सितंबर से प्रारंभ हो रही है। इस पहल का उद्देश्य सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती एवं डिजिटल रूप से एकीकृत सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों, जिला मुख्यालयों, बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों के बीच संपर्क को सुदृढ़ बनाना है।
सत्र में परिवहन के विभिन्न मॉडलों पर चर्चा की गई। जहां विषय विशेषज्ञों द्वारा अपने-अपने विचार एवं सुझाव रखे गये। परिवहन सचिव सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुगम और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में एक समान मॉडल लागू करने के बजाय क्षेत्र की आवश्यकता और यात्री मांग के अनुरूप लचीला मॉडल अपनाया जाना आवश्यक है।
विशेष रूप से मुख्य क्षेत्र से लगा हुआ इलाका एवं उपनगरीय क्षेत्रों में यात्री मांग अपेक्षाकृत कम होने के कारण ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति की आवश्यकता है। ऐसे क्षेत्रों में एनसीसी मॉडल को प्रारंभिक वित्तीय सहयोग अथवा उपयुक्त सब्वेन्शन देकर आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सकता है, जबकि जहां यात्री मांग पर्याप्त है, वहां एनसीसी मॉडल के माध्यम से बस संचालन को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। इस प्रकार जीसीसी (ग्रास कोस्ट कॉन्ट्रेक्ट), एनसीसी (नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) तथा आवश्यकतानुसार वित्तीय सहायता के मिश्रित एवं लचीले मॉडल को अपनाकर प्रत्येक क्षेत्र की परिवहन आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्था विकसित की जा सकती है। साथ ही निजी ऑपरेटरों को आवश्यक लचीलापन एवं सहयोग प्रदान करते हुए उनकी विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग किया जाए, ताकि सेवा संचालन प्रभावी बना रहे और यात्रियों को नियमित एवं विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।
पैनल डिस्कशन में आधुनिक परिवहन व्यवस्था में आईटीएमएस, सीसीटीवी, जीपीएस, ड्राईवर मॉनीटरिंग एवं एआई आधारित तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।
इस अवसर पर अर्बन मोबिलिटी एडवाइजर श्रेया गडेपल्ली, प्रोडक्ट प्लानिंग एंड स्ट्रैटेजी फॉर ग्लोबल मार्केट्स, सीवी पैसेंजर बिज़नेस, टाटा मोटर्स लिमिटेड के प्रमुख टी. श्रीनिवास, बिज़नेस पार्टनर, यश टेक्नोलॉजिस से के. संजय रेड्डी, चलो मोबिलिटी सीईओ मोहित दुबे, डायरेक्टर मेवेंटेक लैब्स प्राइवेट लिमिटेड संकल्प बाजपेयी, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रैपिडो पवनदीप सिंह एवं मॉडरेटर के रूप में नेशनल हेड सिटीज़ डब्ल्यूआरआई इंडिया अविनाश द्विवेदी ने सहभागिता की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर