मंदसौर में भव्यता के साथ मनाई गई वीर शिरोमणि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जन्मजयंती

 


मंदसौर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में सोमवार को सकल वाल्मीकि समाज के तत्वावधान में गांधी चौराहा स्थित श्याम बाबा मंदिर प्रांगण में वीर शिरोमणि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जन्मजयंती अत्यंत हर्षाेल्लास और धूमधाम के साथ मनाई गई।

इस भव्य आयोजन में समाज की माताएं, बहनें, वरिष्ठजन और युवा साथियों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत महिला शक्ति द्वारा महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर की गई, जिसके पश्चात समाज के प्रबुद्धजनों ने जयंती के उपलक्ष्य में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वाल्मीकि सेना मार्शल कौम के प्रदेश महामंत्री एवं उज्जैन संभाग प्रभारी विनोद खैरालिया ने कहा कि हमें अपने महापुरुषों और गुरुओं के दिखाए गए मार्ग पर चलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आज समाज को राजनीतिक नेताओं की नहीं, बल्कि सच्चे सामाजिक नेतृत्व की आवश्यकता है, जो समाज के कर्मचारियों और अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से लड़ सके। थानसिंह घावरी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान वाल्मीकि जी ने जिस कलम से रामायण की रचना कर दी थी, उसी कलम को आज हमें अपने समाज के उत्थान और अधिकारों के लिए हथियार बनाना पड़ेगा।

समाज के पटेल मुकेश चनाल ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने सदियों तक घोर तपस्या की थी, जिसके दौरान उनका पूरा शरीर दीमक से ढक चुका था और केवल उनके होंठ और आंखें ही दिखाई दे रहे थे। इतनी कठिन तपस्या के बाद वे ब्रह्मज्ञानी बने और एक महान ग्रंथ रामायण की रचना की। हेमा कंडारे ने समाज में एकता और अखंडता बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि आने वाले समय में वाल्मीकि जयंती को और भी अधिक भव्य रूप में मनाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया