स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से सशक्त बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता : जयभान सिंह पवैया
- भोपाल के सुनियोजित विकास, राजस्व संवर्धन और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जनप्रतिनिधियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
भोपाल, 24 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर, सशक्त और सक्षम बनाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। स्थानीय निकायों की आर्थिक मजबूती ही नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और समग्र विकास की आधारशिला बनेगी।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पवैया की अध्यक्षता में बुधवार को लालघाटी स्थित वीआईपी गेस्ट हाउस में भोपाल के जनप्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में नगरीय निकायों एवं पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण, स्वयं के राजस्व स्रोतों में वृद्धि, आधारभूत संरचना विकास तथा जनसुविधाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के आय-व्यय, स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की विकास आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में भोपाल के प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, सांसद आलोक शर्मा, विधायकगण भगवानदास सबनानी, विष्णु खत्री व आतिफ आरिफ अकील, भोपाल महापौर मालती राय, जिला पंचायत अध्यक्ष रामकुंवर नवरंग गुर्जर, राज्य वित्त आयोग के सदस्य सचिव वीरेंद्र कुमार, सदस्य के.के. सिंह एवं ऋषि गर्ग सहित संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष पवैया ने सभी जनप्रतिनिधियों से स्थानीय निकायों के स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने, वित्तीय स्वावलंबन सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए व्यवहारिक एवं दीर्घकालिक सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने पर्यटन स्थलों के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष वित्तीय प्रावधानों और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी सुझाव मांगे।
बैठक में भोपाल के दीर्घकालिक और सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर व्यापक सहमति व्यक्त की गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मास्टर प्लान लागू होने से शहर के विस्तार, आधारभूत संरचना विकास, यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा निवेश की संभावनाओं को नई दिशा मिलेगी। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप ने नगरीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत बनाने के लिए मुद्रांक शुल्क पर अधिरोपित उपकर का लाभ सीधे नगरीय निकायों को दिए जाने तथा शासकीय भवनों द्वारा भी नियमानुसार संपत्ति कर भुगतान सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय निकायों के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और वे विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कर सकेंगे।
सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल के ऐतिहासिक जलाशयों, विशेष रूप से बड़ा तालाब के संरक्षण और कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शहर के प्रमुख चौराहों पर फ्लाईओवर निर्माण, सड़क अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण तथा पर्यटन विकास के लिए समेकित कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने वित्तीय संसाधनों को सुदृढ़ बनाने के लिए कर एवं सेवा शुल्कों की तार्किक समीक्षा के लिए एक नियामक व्यवस्था विकसित करने की भी बात कही।
विधायक भगवानदास सबनानी ने नगरीय निकायों के राजस्व संग्रहण को बेहतर बनाने के लिए जल प्रदाय व्यवस्था में सुधार, व्यक्तिगत जल कनेक्शनों को प्रोत्साहन तथा नए पर्यटन एवं मनोरंजन केंद्रों के विकास पर बल दिया। विधायक विष्णु खत्री ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए समग्र विकास दृष्टि के साथ एकीकृत मास्टर प्लान तैयार करने, समूह नल-जल योजनाओं को बढ़ावा देने, ग्रामीण परिवहन सेवाओं के विस्तार तथा पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के सुझाव दिए।
महापौर मालती राय ने नगर निगम के समक्ष वित्तीय संसाधनों और विकास परियोजनाओं से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं विभिन्न अनुमतियों के अभाव में लंबित हैं। उन्होंने प्रमुख सार्वजनिक स्थलों के रख-रखाव और उनसे प्राप्त होने वाले राजस्व के बीच संतुलन स्थापित करने, विभागों के मध्य बेहतर समन्वय तथा नगर निगम की वित्तीय क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और सशक्त नगर निगम ही नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और आधुनिक शहरी सुविधाएं उपलब्ध करा सकता है। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने, राजस्व स्रोतों का विस्तार करने तथा भोपाल सहित पूरे संभाग के संतुलित, समावेशी और सतत विकास के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर