इंदौरः रबी सीजन से पहले रिएक्टिव पावर क्षमता मजबूत, सिमरोल में भी लगा कैपेसिटर बैंक

 


- इंदौर जिले के 21 ईएचवी सबस्टेशनों में 505 एमवीएआर क्षमता के 41 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील

इंदौर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने रबी सीजन के ठीक पहले इंदौर जिले के ट्रांसमिशन नेटवर्क को और सुदृढ़ किया है। जिले के 21 एक्स्ट्रा हाई टेंशन (ईएचवी) सबस्टेशनों में अब 41 कैपेसिटर बैंक लगे हैं, जिनकी कुल क्षमता 505 एमवीएआर है।

एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता (टेस्टिंग) एमवाय मंसूरी ने गुरुवार को बताया कि जिले में केवल 132 केवी सिमरोल सबस्टेशन ऐसा बचा था, जहां कैपेसिटर बैंक स्थापित नहीं था। हाल ही में वहां भी 12 एमवीए क्षमता का कैपेसिटर बैंक स्थापित कर उसे ऊर्जीकृत कर दिया गया है। इसके साथ ही जिले के सभी ईएचवी सबस्टेशनों में रिएक्टिव पावर कंपनसेशन की व्यवस्था हो गई है।

प्रदेश में 750 कैपेसिटर बैंक, वोल्टेज प्रोफाइल में सुधार

उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर पर एमपी ट्रांसको ने वित्तीय वर्ष 2025-26 और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 29 नए कैपेसिटर बैंक स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किए हैं। वर्तमान में प्रदेश के ईएचवी सबस्टेशनों में कुल 750 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 9383.5 एमवीएआर है। यह क्षमता प्रदेश की अब तक की अधिकतम रिएक्टिव पावर मांग 6776 एमवीएआर से लगभग 38 प्रतिशत अधिक है, जिससे भविष्य की जरूरतों के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था है। इससे वोल्टेज प्रोफाइल बेहतर हुआ है और कृषि उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज पर बिजली मिल रही है।

ऊर्जा मंत्री ने की पहल की सराहना

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एमपी ट्रांसको ने जरूरत के हिसाब से ईएचवी सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंक स्थापित किए हैं। कंपनी के 418 सबस्टेशनों में से अधिकांश में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक संचालित हैं। पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकतानुसार नए बैंक लगाए जा रहे हैं और मौजूदा क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे प्रदेश में विद्युत गुणवत्ता और वोल्टेज स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता बढ़ाई गई

मुख्य अभियंता मंसूरी ने बताया कि कंपनी ने ऐसे 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की थी, जिनकी उपयोगी आयु पूरी हो चुकी थी और जो अपेक्षित कैपेसिटिव सपोर्ट नहीं दे पा रहे थे। इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले नए बैंक लगाने और पुराने उपकरण बदलने का अभियान चलाया गया, जिससे रिएक्टिव पावर कंपनसेशन क्षमता में अब तक 309 एमवीएआर की बढ़ोतरी हुई है।

कैपेसिटर बैंक से क्या लाभ

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 220 केवी सबस्टेशनों पर 132 केवी सिस्टम के लिए 33 कैपेसिटर बैंक तथा 132 केवी सबस्टेशनों पर 33 केवी सिस्टम के लिए 717 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल 750 बैंकों से 9383.5 एमवीएआर क्षमता उपलब्ध है, जिसमें 132 केवी की 1073 एमवीएआर और 33 केवी की 8310.5 एमवीएआर शामिल है।

कैपेसिटर बैंक से क्या लाभ

मंसूरी के अनुसार सिंचाई पंप, औद्योगिक मोटरें और अन्य उपकरण प्रायः इंडक्टिव लोड उत्पन्न करते हैं, जिससे वोल्टेज में गिरावट और पावर फैक्टर में कमी आती है। कैपेसिटर बैंक इस प्रभाव की भरपाई कर रिएक्टिव पावर उपलब्ध कराते हैं। इससे वोल्टेज प्रोफाइल सुधरता है, पावर फैक्टर बेहतर होता है, ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर भरोसेमंद बिजली मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर