मप्र के इंदौर में रंगपंचमी पर निकली पारंपरिक गेर, टैंकों-मिसाइलों से हो रही रंगों की बौछार
इंदौर, 08 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में रविवार को रंगपंचमी पर शहर की दशकों पुरानी परंपरा एक बार फिर सजीव हो उठी। यहां होलकर शासनकाल से चली पारंपरिक गेर में मिसाइलों से गुलाल और टैंकों से रंगों की बौछार हो रही है, जिससे आसमान रंगीन हो गया है। उमंग के रंगों में डूबने के लिए हजारों लोग यहां जुटे हैं।
दरअसल, रंगपंचमी पर 77 वर्षों से चली आ रही गेर (चल समारोह) की परंपरा को निभाने के लिए शहर की प्रतिष्ठित संस्थाएं अपने-अपने बैनर तले गेर निकालते हैं। इस बार शहर में टोरी कॉर्नर की गेर से रंगों के उत्सव की शुरुआत हुई। यही टोली रंगपंचमी की पारंपरिक गेर में सबसे आगे हैं। इसमें तीन टैंकरों पर मिसाइलें लगाकर रंग बरसाया जा रहा है। वहीं, नगर निगम की गेर में हाथी की प्रतिकृति की सूंड से रंगीन पानी की बौछार की जा रही है।
संगम कॉर्नर समिति की गेर में बरसाना की टीम लट्ठमार होली खेल रही है। इसमें राधा-कृष्ण की जोड़ी रासरंग करती शामिल है। युवाओं की टोली देशभक्ति के तरानों पर नाचती-झूमती करती चल रही है। मॉरल क्लब समिति की गेर में 15 ब्लोअर मशीनें, 6 डीजे गाड़ियां, एक बड़ी बोरिंग मशीन और 6 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शामिल हैं। चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर रंग और गुलाल की बौछारों के बीच पारंपरिक गेर का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हैं और मस्ती में झूमते नजर आ रहे हैं। हर चेहरा रंगा हुआ है और हर दिल उत्सव के रंग में डूबा नजर आ रहा है।
गेर में धार्मिक-सामाजिक के साथ ही देशभक्ति के रंग भी नजर आ रहे हैं। हिंद रक्षक की फाग यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तो संगम कार्नर की गेर में महाकाल की जटा से गंगाजी के अवतरित होने का दृश्य नजर आ रहा है। इसमें पुरुषों की टोली भगवा ध्वज लेकर चल रही है। भगवान भोलेनाथ की सवारी और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की झांकी भी इसमें शामिल है। शहर की हृदय स्थली दोपहर तीन बजे तक टैंकरों, बोरिंग मशीन, मिसाइलों के साथ ही विभिन्न उपकरणों से लाल-गुलाबी, हरे, पीले, नीले रंग उत्साह से उड़ाकर धरती के साथ आसमान भी रंगों से सराबोर होती रहेगी।
स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा रंगपंचमी पर इंदौर में निकलने वाली पारंपरिक गेर को निहारने के लिए तीन इमारतों की छतों पर बैठक व्यवस्था की गई है। इसमें गौराकुंड के पास पृथ्वी लोक होटल की दो इमारत व बालाजी टावर पर यह बैठक व्यवस्था है। यहां की छतों पर तिरपाल लगाई गई है और दर्शकों के लिए पेयजल व सुविधाघर की व्यवस्था भी है।
इंदौर में राजवाड़ा के सामने मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रहने वाले गेर देखने के लिए छतों पर मौजूद हैं। आशीष वाघेला ने कहा कि पिछले 40 साल से गेर देख रहा हूं। हर बार अलग अनुभव होता है। गेर देखने के लिए रिश्तेदार भी हमारे यहां आते हैं। वहीं, स्वाति चौहान ने कहा कि इंदौर की गेर रंगों के माध्यम से भेदभाव खत्म कर लोगों को एक करने का काम करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर