इंदौरः केन्द्रीय जेल में सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का आयोजन
- जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने प्रथम पार्थिव शिवलिंग बनाकर किया शुभारंभ
- करीब एक हजार बंदियों एवं 51 महिला बंदिनियों ने श्रद्धापूर्वक किया सहभागिता
इंदौर, 10 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित केन्द्रीय जेल में श्रावण मास के पावन अवसर पर स्थापित शिवलिंग के पंचम वर्ष के उपलक्ष्य में सोमवार को सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, मध्य प्रदेश के महानिदेशक वरुण कपूर के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
कार्यक्रम में केन्द्रीय जेल इंदौर के मुख्य द्वार पर जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे एवं जेल अधिकारियों द्वारा मुख्य अतिथि वरुण कपूर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात केन्द्रीय जेल के मुख्य सभागृह में वरुण कपूर ने प्रथम पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया।
शिव स्त्रोत एवं मंत्रोच्चार के साथ हुआ पार्थिव शिवलिंग निर्माण
महायज्ञ के मुख्य शिवलिंग निर्माण का संकल्प मुख्य यजमान दंपति वरुण कपूर एवं सोम्या कपूर द्वारा लिया गया। शिव स्त्रोत, मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम में केन्द्रीय जेल में निरुद्ध विचाराधीन एवं दण्डित बंदियों तथा महिला बंदिनियों ने भी श्रद्धापूर्वक सहभागिता की।
मुख्य निर्माण स्थल सभागृह के साथ-साथ जेल के विभिन्न वार्डों में भी बंदियों एवं बंदिनियों द्वारा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया गया। इस दौरान जेल में मौजूद बंदियों की भजन मंडली द्वारा शिव स्तुति एवं शिव भजनों की प्रस्तुति दी गई। संपूर्ण कार्यक्रम के दौरान मंत्रोच्चार के साथ जेल परिसर में स्थापित शिवलिंग का रुद्राभिषेक भी किया गया।
कार्यक्रम में करीब 1000 बंदियों एवं 51 महिला बंदिनियों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम के पश्चात सभी सहभागी बंदियों एवं बंदिनियों को फरियाली अल्पाहार भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे, उप अधीक्षक इंदर सिंह नागर, उप अधीक्षक संतोष कुमार लडिया, वरिष्ठ परिवीक्षा एवं कल्याण अधिकारी अभिषेक दांगी सहित जेल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों एवं बंदिनियों में आध्यात्मिक एवं सकारात्मक भावनाओं का विकास करना, मानसिक शांति प्रदान करना तथा आत्मचिंतन की भावना को प्रोत्साहित करना है। इस प्रकार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, अपने जीवन में अच्छे विचारों को आत्मसात करने तथा समाज की मुख्यधारा से पुनः जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर