इंदौर: फायर सेफ्टी को लेकर जिला प्रशासन सख्त, बहु मंजिला इमारतों में 15 दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश

 


इंदौर, 22 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में हुए अग्नि हादसे के बाद फायर सेफ्टी को जिला प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। इसी क्रम में रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने राजस्व अधिकारियों, नगर निगम के अधिकारियों, फील्ड बिल्डिंग ऑफिसर्स एवं बिल्डिंग इंस्पेक्टर्स की संयुक्त बैठक ली, जिसमें शहर की बहुमंजिला व्यावसायिक और अन्य इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सख्त निर्णय लिए गए।

बैठक में तय किया गया कि जी+3 एवं उससे अधिक ऊंचाई वाली सभी कमर्शियल और अन्य बिल्डिंग्स को 15 दिन का समय दिया जाएगा, जिसमें उन्हें अपने फायर सेफ्टी प्लान एवं व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त करना होगा। इस अवधि के बाद यदि किसी भवन में आवश्यक फायर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाता है, तो संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम के नेतृत्व में गठित दलों द्वारा कल से ही फायर सुरक्षा मानकों की व्यवस्थाओं के निरीक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इस दौरान रैंडम निरीक्षण भी किए जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भवनों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकासी मार्ग (एग्जिट), एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध और कार्यशील हैं। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि संबंधित भवनों ने नियमानुसार अनुमति (लाइसेंस) प्राप्त की है या नहीं।

बैठक में यह भी सामने आया कि कई भवनों में निर्माण के बाद अतिरिक्त या अवैध निर्माण किया गया है, जो बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक होने पर नोटिस जारी कर सुधार कार्य करवाया जाएगा या अवैध हिस्सों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा प्रमुख रूप से निर्देश दिये गए कि सभी जी+3 एवं उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों में फायर सेफ्टी उपकरणों की अनिवार्य रूप से जांच कर उन्हें कार्यशील स्थिति में रखा जाए। प्रत्येक भवन में आपातकालीन निकासी मार्ग (Emergency Exit) स्पष्ट, अवरोध मुक्त एवं चिन्हित होना सुनिश्चित किया जाए। बिना अनुमति किए गए अतिरिक्त निर्माणों को तत्काल चिन्हित कर नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले भवनों के विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण सहित दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

अधिकारियों ने फायर सेफ्टी से संबंधित निरीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता जताई। इस पर कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फायर सेफ्टी मानकों एवं प्रक्रियाओं की समुचित ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। कलेक्टर ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल भी विशेष रूप से मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर