इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने लगाया मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर
- मन कक्ष दल ने नागरिकों को बताए मानसिक तनाव को दूर करने के उपाय
इंदौर, 12 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा अब नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती के लिए भी सकारात्मक पहल की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये जा रहे नियमित उपचार से क्षेत्र में स्थिति अब तेजी से सामान्य हो रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सकारात्मक पहल करते हुए अभियान स्वास्थ्य वर्धन के तहत क्षेत्र में सोमवार को मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मन कक्ष दल द्वारा नागरिकों को भय, तनाव और असुरक्षा के भाव से दूर रहने के उपाय बताये गए। मानसिक मजबूती के लिए उन्हें समझाईश भी दी गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि संपूर्ण स्वास्थ्य सबके लिए एक ऐसी संकल्पना है जिसमें स्वास्थ्य के सभी आयामों का समावेश होता है। इस संकल्पना का साकार करने के लिए जिला प्रशासन के नेतृत्व में भागरीथपुरा प्रभावित क्षेत्र में 'अभियान स्वास्थ्यवर्धन' का आरंभ गत 10 जनवरी से किया गया है। इस अभियान के तहत गैर संचारी रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं एवं डायरिया संक्रमण रोकने के लिए उचित परामर्श, जॉच, औषधि वितरण, रोगियों का चिन्हांकन, रेफरल तथा उपचार तक पहॅुच का कार्य सतत किया जा रहा है। उक्त् अभियान के तहत सभी नागरिकों से सर्वे दलों ने चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने का आग्रह किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस अभियान में एक बात उभर कर सामने आई कि स्वास्थ्य संबंधी अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए भी आमजन तैयार दिखे, सभी ने संपूर्ण जांचों को अपने लिए उपयोगी बताया। विभाग के सर्वे दल ने मानसिक स्वास्थ्य और मजबूती के लिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी उद्देश्य को लेकर भागीरथपुरा में आज मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। कभी- कभी जीवन में उपस्थित अप्रत्याशित स्थिति भय, तनाव, असुरक्षा की भावना उत्पन्न करती है।
उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में डायरिया के प्रकरण आने पर समुदाय में भय, चिंता, निराशा, असुरक्षा की स्थितियां नहीं आये, इसको दूर करने के लिए सकारात्मक पहल की जा रही है। भागीरथपुरा क्षेत्र में डायरिया संक्रमण से मुक्त होकर नागरिक तेजी से स्वस्थ भी हो रहे हैं, किन्तु मानसिक चिंता अभी कुछ लोगों में शेष है। आज मनकक्ष दल-इंदौर द्वारा मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 17 पुरुषों एवं 33 महिलाओं की स्क्रीनिंग की एवं परामर्श दिया गया। गोदावरी बाई (परिवर्तित नाम) 50 वर्ष/ महिला पिछले 08-10 दिनों से सिरदर्द की शिकायत लेकर आई। स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से मानसिक रोग के उपचार में हैं तथा वर्तमान में भी उपचार चल रहा हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा गोदावरी बाई को एंजायोलाइटिक दवा दी गई तथा काउंसलिंग की गई। सहायक उपाय बताये गए तथा उनसे कहा गया कि उनका बेहतर उपचार कराया जाएगा। साथ ही गहरी श्वास-प्रश्वास (डीप ब्रीथिंग) तकनीक सिखाई गई, सत्र के पश्चात मरीज शांत एवं रिलैकस्ड दिखाई दीं।
मनोचिकित्सक परामर्श शिविर में गंगाबाई (परिवर्तीत नाम) ने बताया कि वे लंबे समय से क्लॉस्ट्रोफोबिया (बंद जगहों से डर) से पीड़ित हैं, जिसके कारण उन्हें काफी मानसिक तनाव रहता है। उन्होंने मोतियाबिंद होने की बात भी बतायी। उन्हें बाहर जाने में कठिनाई होती है तथा वे अपने घर के दरवाजे बंद नहीं कर पाती हैं। बातचीत के दौरान वे चिंतित एवं व्याकुल दिखाई दीं। उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनका समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी कराया जाएगा। उक्त बुजुर्ग महिला को मनो-शिक्षा (Psychoeducation) द्वारा लक्षणों के सामान्यीकरण पर आधारित काउंसलिंग प्रदान की गई। साथ ही गहरी श्वास-प्रश्वास (डीप ब्रीथिंग) जैसी विश्राम तकनीकें सिखाई गई। सहायक उपचार दिया गया तथा आवश्यकता अनुसार दवा की सलाह दी गई। मरीज ने प्रस्तावित आँखों की सर्जरी कराने के लिए स्वयं को तैयार एवं प्रेरित बताया। इसी तरह अन्य नागरिकों को भी मानसिक मजबूती के तौर-तरीके समझाए गए।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर