मप्रः फर्जी आईएएस तृप्ति ने नौकरी के नाम पर युवाओं से ऐंठे रुपये, 90 लाख रुपये की ठगी का आरोप
भोपाल, 26 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में खुद को कभी आईएएस तो कभी बड़े सरकारी विभाग की अधिकारी बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने वाली तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुभाष राजपूत से पूछताछ में ठगी के नए मामले सामने आ रहे हैं।
चंदेरी पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर बुधवार को भोपाल पहुंची और उनके ठिकाने की तलाशी ली। यहां पुलिस को चंदेरी के चार युवाओं के मूल दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का दावा है कि नौकरी लगवाने का भरोसा देकर युवाओं से ये दस्तावेज लिए गए थे।
पुलिस के मुताबिक तृप्ति खुद को अलग-अलग सरकारी पदों पर कार्यरत बताकर लोगों को प्रभावित करती थी। वह सरकारी नौकरी के नाम पर युवाओं से संपर्क करती और बाद में रकम की मांग की जाती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि तृप्ति लैपटॉप के जरिए फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार करती थी। गिरफ्तारी से पहले उसने लैपटॉप से इससे जुड़ा डेटा डिलीट कर दिया था। अब पुलिस लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि डिलीट किए गए डेटा और ठगी से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा सकें।
पुलिस जांच में भोपाल के एक बिल्डर से भी करीब 90 लाख रुपये की ठगी का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरोपी भाई-बहन ने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए बिल्डर को अपने झांसे में लिया था। इसके अलावा सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 80 हजार रुपये लेने की शिकायत भी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक 7 अप्रैल को तृप्ति सिंह राजपूत अपने भाई सुभाष राजपूत, तनुज वैश्य और अंजलि सिंह के साथ चंदेरी पहुंची थी। चारों वहां एक होटल में ठहरे थे। इसी दौरान तृप्ति ने खुद को पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताकर लोगों से पहचान बढ़ाई। आरोप है कि इसी दौरान नौकरी दिलाने को लेकर बातचीत हुई और युवाओं को अपने जाल में फंसाया गया।
भोपाल स्थित ठिकाने की तलाशी के दौरान पुलिस को चंदेरी के चार युवाओं के मूल दस्तावेज मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया जाना था और आरोपियों ने इनके बदले कितनी रकम ली थी। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी के शिकार अन्य लोग भी अब पुलिस से संपर्क कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि तृप्ति को गिरफ्तारी की आशंका हो गई थी। इसी दौरान उसने लैपटॉप से कई महत्वपूर्ण फाइलें और डेटा डिलीट कर दिए। पुलिस अब डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के जरिए इन फाइलों को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी के साथ परिवार के अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।
चंदेरी पुलिस दोनों आरोपियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगने की तैयारी में है। पुलिस पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया, कितनी रकम ली और ठगी में किन लोगों ने उनकी मदद की। पुलिस के मुताबिक अलग-अलग सरकारी विभागों में अधिकारी होने का झांसा देकर लोगों को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर