वक्फ बोर्ड पुनर्गठन पर एमपी हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव समेत अधिकारियों को नोटिस

 


जबलपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन से जुड़ी नोटशीट पर रात 1 बजे हस्ताक्षर किए जाने के मामले में मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है।

बुधवार को कोर्ट ने मुख्य सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी और वक्फ बोर्ड के सीईओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सिवनी निवासी शोएब राजा खान की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की। याचिका में राज्य सरकार की ओर से 4 जुलाई 2026 को जारी वक्फ बोर्ड के नए गठन की अधिसूचना को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में सवाल उठाया गया कि वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की प्रक्रिया सामान्य कार्यालयीन समय में पूरी की जा सकती थी, तो संबंधित नोटशीट पर रात 1 बजे हस्ताक्षर करने की जरूरत क्यों पड़ी। याचिका में इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, 3 जुलाई को वक्फ बोर्ड के चार सदस्यों फैजान खान, डॉ. सनवर पटेल, फातिमा चौधरी और इनाउर रहमान ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। इसके अगले ही दिन 4 जुलाई को राज्य सरकार ने नोटशीट के जरिए इस्तीफे स्वीकार किए और वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि नए बोर्ड का गठन बिना चुनाव या निर्धारित वैधानिक चयन प्रक्रिया के किया गया। याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम की धारा 99 का हवाला देते हुए दलील दी कि बोर्ड को भंग या सुपरसीड किए बिना उसके कार्यकाल के बीच पूरे बोर्ड का नए सिरे से गठन नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर 4 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नई अधिसूचना को चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से ब्रह्मदत्त सिंह ने कोर्ट में पक्ष रखा। दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

अब 28 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद हाईकोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक