ग्वालियरः दीनदयाल रसोई” आत्मसम्मान भी परोसती है, अब तक 59 लाख से अधिक लोगों को करा चुकी है भोजन

 


ग्वालियर, 19 अप्रैल (हि.स.)। कहा जाता है कि भूखे को भोजन कराना ही सबसे बड़ी सेवा है, लेकिन जब यह भोजन केवल पेट न भरे बल्कि व्यक्ति के आत्म-सम्मान को भी बढ़ाए, तो वह 'जन-कल्याण' की असली मिसाल बन जाता है।

मध्य प्रदेश सरकार की 'मुख्यमंत्री दीनदयाल रसोई योजना' ग्वालियर में पिछले नौ वर्षों से इसी संकल्प को चरितार्थ कर रही है। महज पांच रुपये में दाल, चावल, सब्जी और 5 रोटियों वाला पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर जरूरतमंद लोगों और श्रमिकों के लिए 'अन्नपूर्णा' की भूमिका निभा रही है।

दीनदयाल रसोई में भोजन करने वाले जरूरतमंदों का कहना है कि यहां मिलने वाले भोजन की थाली सही मायने में “सम्मान वाली थाली” है, जिसमें हमें भोजन के साथ आत्मसम्मान भी परोसा जाता है।

जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि ग्वालियर में “दीनदयाल रसोई” अब तक लगभग 59 हजार से अधिक जरूरतमंदों को भोजन करा चुकी है। ग्वालियर में प्रदेश सरकार द्वारा सात अप्रैल 2017 को मुख्य बस स्टैंड पर पहली दीनदयाल रसोई शुरू की गई थी। ग्वालियर में अब कुल 8 “दीनदयाल रसोई” हो गई हैं। इनमें से चार स्थायी रसोई जो मुख्य बस स्टेण्ड, राजपायगा रोड, झांसी रोड बस स्टेण्ड व इंटक मैदान में संचालित हैं। चार चलित दीनदयाल रसोई सुबह-सुबह उन चौराहों पर दस्तक देती हैं, जहां श्रमिक काम की तलाश में जुटते हैं।

उल्‍लेखनीय है कि यह रसोई केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ऐसे हजारों श्रमिकों, गरीब परिवारों के विद्यार्थियों और मरीजों के परिजनों के लिए एक बड़ा संबल है, जो दूसरे शहरों से ग्वालियर आते हैं।

तकनीक और स्वच्छता का संगम

इस सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रसोई में आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है। प्रतिदिन सुबह पांच बजे से ही 'अन्न सेवा' का कार्य प्रारंभ हो जाता है। आधुनिक मशीनों से प्रतिदिन औसतन 15,000 रोटियां तैयार की जाती हैं। प्रबंधन की कुशलता ऐसी है कि मेनू के अनुसार रोटियों और चावल की मात्रा तय की जाती है, ताकि भोजन की बर्बादी रत्ती भर भी न हो।

जरूरतमंदों को भोजन कराने सरकार और समाज साथ आए

दीनदयाल रसोई की सबसे बड़ी सफलता इसकी विश्वसनीयता है। आज स्थिति यह है कि यहाँ दानदाताओं की 7 दिन की एडवांस वेटिंग रहती है। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से अस्पतालों मसलन जयारोग्य अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर और कैंसर अस्पताल जैसे स्थानों पर मरीजों के परिजनों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शहर के सेवाभावी नागरिक अपने जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या अपनों की स्मृति में यहाँ भोजन प्रायोजित करते हैं।

त्यौहारों और विशेष अवसरों पर तो यह मांग इतनी बढ़ जाती है कि प्रबंधन को कई दिन पहले से बुकिंग संभालनी पड़ती है। मध्य प्रदेश सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया है कि प्रदेश की सरकार उसके साथ खड़ी है। मात्र 5 रुपए में मिलने वाली यह सम्मान की थाली ग्वालियर में सेवा और सुशासन की पहचान बन चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर