मप्रः बारिश में सर्पदंश के बढ़ते जोखिम को देखते हुए शासन ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश

 


- सर्पदंश से बचाव के लिए नागरिकों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह

भोपाल, 11 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए सर्पदंश को ‘स्थानीय आपदा’ घोषित किया गया है। वर्षा ऋतु में सांपों के प्राकृतिक आवास एवं बिलों में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित एवं सूखे स्थानों की तलाश में मानव बस्तियों, घरों और खेतों के आसपास आने लगते हैं। इससे सर्पदंश की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

इसके प्रभावी प्रबंधन एवं नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए ग्रह विभाग के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जिलों को व्यापक एवं समन्वित कार्ययोजना के तहत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

शुक्रवार को जारी निर्देश के अनुसार, पंचायत एवं शहरी वार्ड स्तर तक जन-जागरूकता, प्रशिक्षित सर्प-मित्रों एवं सर्प पकड़ने वालों की उपलब्धता, सभी शासकीय अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में विषरोधी औषधि (एंटी-वेनम) की व्यवस्था और सर्पदंश की घटनाओं का जिला स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

शासकीय अस्पतालों में एंटी-वेनम की उपलब्धता अनिवार्य

प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयों, उपकरणों तथा पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीण पंचायतों एवं शहरी वार्डों में प्रशिक्षित स्नेक-कैचर्स अर्थात सर्प-मित्रों का डेटाबेस तैयार करने तथा उनकी सेवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचें

राज्य शासन ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की घटना होने पर झाड़-फूंक, अंधविश्वास अथवा अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों में समय न गंवाते हुए पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाया जाए। सर्पदंश के उपचार में समय पर चिकित्सकीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आवश्यकता के अनुसार एंटी-वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

पंचायत एवं वार्ड स्तर पर जारी होंगे हेल्पलाइन नंबर

नागरिकों को सर्प रेस्क्यू एवं उपचार की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराने के लिए पंचायत एवं वार्ड स्तर पर स्थानीय हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। इन नंबरों के माध्यम से नागरिक सर्प रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित सर्प-मित्रों से संपर्क करने के साथ ही निकटतम एंटी-वेनम उपलब्ध शासकीय अस्पताल की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। सर्प-मित्रों को सुरक्षित रेस्क्यू के लिए आवश्यक स्नेक रेस्क्यू किट एवं फर्स्ट-एड सामग्री उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

जागरूकता एवं प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये

सर्पदंश से बचाव और सुरक्षा के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि’ योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों एवं कृषि चौपालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रेडियो जिंगल्स, सोशल मीडिया और प्रचार पुस्तिकाओं के माध्यम से भी नागरिकों को सर्पदंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।इसके साथ ही आपदा मित्रों, सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सांपों की पहचान, सर्पदंश की स्थिति में आवश्यक सावधानियों एवं प्राथमिक उपचार संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दैनिक जीवन में सतर्कता से करें सर्पदंश से बचाव

राज्य शासन ने नागरिकों से दैनिक जीवन में आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। खेतों एवं झाड़ियों में काम करते समय लंबे जूते अथवा गमबूट और मोटे दस्ताने पहनने, रात में टॉर्च अथवा पर्याप्त रोशनी का उपयोग करने तथा अंधेरे में चलने से बचने की सलाह दी गई है। जमीन पर सोने से बचने और चारपाई अथवा पलंग पर मच्छरदानी का उपयोग करने को कहा गया है।जूते, कपड़े एवं स्लीपिंग बैग का उपयोग करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचने और झाड़ने, घरों, दुकानों एवं पशु-बाड़ों के आसपास कचरा, कबाड़ एवं ऊंची घास न जमा होने देने तथा दीवारों की दरारों एवं बिलों को बंद रखने की सलाह दी गई है।

सर्पदंश के लक्षणों की तत्काल पहचान जरूरी

सर्पदंश के बाद दंश वाले स्थान पर दर्द, सूजन, लालिमा, दांतों के निशान अथवा त्वचा का नीला या काला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा उल्टी, जी मिचलाना, कंपकंपी, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, रक्तचाप कम होना तथा असामान्य रक्तस्राव जैसी स्थिति भी हो सकती है। विषैले सांप के काटने पर पलकें उठाने, बोलने अथवा सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब किए पीड़ित को अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है।

सर्पदंश की स्थिति में करें प्राथमिक उपचार

सर्पदंश की घटना के बाद पीड़ित को शांत रखें और काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें। पीड़ित को तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल ले जाएं। सांप को पकड़ने अथवा मारने का प्रयास न करें। यदि सुरक्षित दूरी से सांप का रंग, आकार अथवा अन्य पहचान संबंधी जानकारी देखी गई हो तो चिकित्सक को बताई जा सकती है, लेकिन इसके लिए अस्पताल पहुंचने में किसी प्रकार की देरी न करें।

सर्पदंश होने पर क्या न करें

सर्पदंश के घाव पर चीरा लगाकर काटने अथवा मुंह से विष चूसने का प्रयास नहीं करना चाहिए। दंश स्थल पर बर्फ या आइस पैक न लगाएं और बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा, मलहम या जड़ी-बूटी न लगाएं। मरीज को शराब अथवा अन्य नशीले पेय भी न दें। सर्पदंश की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण कदम पीड़ित को बिना विलंब अधिकृत अस्पताल तक पहुंचाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर