मप्र के शहडोल के वन बाघों और हाथियों के लिए है नेचुरल कॉरिडोर
- 4 टाइगर रिजर्व को जोड़ते हैं ये कॉरिडोर
भोपाल, 24 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश का शहडोल जिला अपनी समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के कारण वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। जिले के सघन वन बाघों, हाथियों, तेंदुओं और भालुओं सहित अनेक वन्यप्राणियों की आवाजाही के लिए प्राकृतिक गलियारे (नेचुरल कॉरिडोर) का काम करते हैं।
जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने शनिवार को बताया कि शहडोल जिले के नेचुरल कॉरिडोर चार टाइगर रिजर्व को जोड़ते हैं। शहडोल की भौगोलिक स्थिति मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि शहडोल स्वयं टाइगर रिजर्व नहीं है, लेकिन इसका वन क्षेत्र उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, कान्हा टाइगर रिजर्व, सीधी जिले के संजय गांधी टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से जुड़े वन्यजीव गलियारों की दृष्टि से अहम है। विशेष रूप से दक्षिण वन मंडल का वन क्षेत्र इन संरक्षित वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही में महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करता है।
प्राकृतिक आवास और भोजन-पानी की उपलब्धता अहम
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, शहडोल के घने जंगल, साल के वन, पानी के प्राकृतिक स्रोत और भोजन की उपलब्धता वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाते हैं। बाघ अपने क्षेत्र का विस्तार करने, नए आवास तलाशने और भोजन की उपलब्धता के अनुसार दूसरे वन क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। इसी तरह हाथी अपने पारंपरिक मार्गों से लंबी दूरी तय करते हैं। इन प्राकृतिक गतिविधियों के दौरान शहडोल के जंगल वन्यप्राणियों को एक वन क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचने में मदद करते हैं।
उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हाथियों की मौजूदगी भी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ से आने वाले हाथियों की अनूपपुर और शहडोल के वन क्षेत्रों से होकर बांधवगढ़ तक आवाजाही इन जंगलों के महत्व को दर्शाती है। वर्ष 2018 के आसपास बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथियों का आगमन शुरू होने के बाद से यहां उनकी मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
वन्यजीव गलियारों का संरक्षण जरूरी
वन्यजीव गलियारे वे प्राकृतिक मार्ग हैं, जिनके माध्यम से वन्यप्राणी एक जंगल से दूसरे जंगल तक स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं। इन मार्गों में जंगलों के साथ नदियां, पहाड़ियां, गांव और आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं। गलियारों के सुरक्षित रहने से वन्यजीवों के बीच अलग-अलग वन क्षेत्रों में आवाजाही और संपर्क बना रहता है।
वन्यजीव गलियारों में जंगलों की कटाई, निर्माण कार्य या अन्य गतिविधियों से व्यवधान उत्पन्न होने पर वन्यप्राणियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे उनके प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क कमजोर होने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है। इसलिए गलियारों का संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
वन्यजीवों की मौजूदगी पर सतर्कता जरूरी
बाघों और हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। जंगल या गांव के आसपास वन्यजीव दिखाई देने पर उनके नजदीक जाने, उन्हें घेरने या उकसाने से बचना चाहिए और इसकी सूचना वन विभाग को देनी चाहिए। वन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास तथा पानी और भोजन की उपलब्धता बनाए रखना भी वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शहडोल, अनूपपुर और उमरिया के वन क्षेत्रों का संरक्षण पूरे संभाग की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है। शहडोल के जंगल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना बाघों, हाथियों और अन्य वन्यप्राणियों के संरक्षण, जैव विविधता बनाए रखने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका कम करने की दिशा में आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर