मप्रः सेमी कंडक्टर क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक, नवाचार एवं कौशल विकास पर जोर
मप्र सेमी कंडक्टर समिट–2026 के दूसरे दिन 05 पैनल चर्चाओं में उद्योगपतियों, विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों ने साझा किए विचार
भोपाल, 24 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 02 दिवसीय मध्य प्रदेश सेमी कंडक्टर समिट–2026 के दूसरे दिन शनिवार को 05 विषयों पर पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। उद्योगपतियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शासन के प्रतिनिधियों ने सेमी कंडक्टर क्षेत्र के विकास, स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के विस्तार तथा मध्य प्रदेश में निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। चर्चाओं में तकनीक, अनुसंधान, कौशल विकास, अधोसंरचना और नीतिगत सहयोग के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
प्रथम पैनल :एआई और सेमी कंडक्टर तकनीक के परस्पर संबंधों पर चर्चा
प्रथम पैनल का संचालन रेनेसॉ की चित्रा हरिहरन ने किया। चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप डिजाइन की प्रक्रिया को अधिक तेज, प्रभावी एवं स्वचालित बनाने में सहायक है। एआई के बढ़ते उपयोग के लिए अधिक शक्तिशाली एवं उन्नत चिप्स की आवश्यकता है। इस प्रकार दोनों तकनीकें एक-दूसरे के विकास को गति प्रदान कर रही हैं।
एमपीएसईडीसी के प्रबंध निदेशक अंशुमन राज ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने सेमी कंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया है। इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन के पूरक के रूप में प्रदेश की सेमी कंडक्टर नीति लागू की गई है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में समय, निरंतर सहयोग, पर्याप्त सहायता और भरोसा आवश्यक है। प्रदेश सरकार निवेशकों के साथ खड़ी है और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
इंटेल के वरिष्ठ प्रधान अभियंता अर्पण सिरकर ने प्रतिभा तथा सुदृढ़ प्रबंधन एवं नीतिगत व्यवस्था की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एआई की गति और दक्षता बढ़ाने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता के साथ डेटा ट्रांसफर, मेमोरी और सॉफ्टवेयर का कुशल समन्वय भी आवश्यक है।
सह-संस्थापक एवं निदेशक आशीष लछवानी ने कहा कि एआई की सहायता से एनालॉग, रेडियो फ्रीक्वेंसी, मिक्स्ड-सिग्नल और पावर सेमी कंडक्टर जैसी जटिल चिप्स का डिजाइन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने डिजाइनर की मंशा को समझने वाले एआई टूल्स एवं स्वायत्त डिजाइन प्रणालियों के माध्यम से विकास का समय कम करने और नई संभावनाएँ तलाशने पर जोर दिया।
ग्रुप डायरेक्टर चन्नकेशव अनंत ने तेज होने के साथ तकनीकी रूप से विश्वसनीय चिप डिजाइन प्रणालियाँ विकसित करने की आवश्यकता बताई। सिनॉप्सिस के स्वप्निल गर्ज ने चिप निर्माण में तकनीकी सत्यापन, सटीकता एवं विश्वसनीयता को अनिवार्य बताया। पुनीत मित्तल ने विद्यार्थियों को एआई को सहायक एवं मार्गदर्शक के रूप में अपनाकर निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया।
पैनल में विद्यार्थियों की मूलभूत तकनीकी समझ, एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप्स तथा स्वदेशी बौद्धिक संपदा के विकास पर भी विचार साझा किए गए। विशेषज्ञों ने एआई को सीखने, समस्याओं को समझने और नए समाधान विकसित करने के साधन के रूप में अपनाने का सुझाव दिया। उपस्थित विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
द्वितीय पैनल : भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का प्रमुख केंद्र बनाना
द्वितीय पैनल में विशेषज्ञों ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमी कंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों, विनिर्माण, अनुसंधान और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
स्पर्श सीसीटीवी के प्रबंध निदेशक संजीव सहगल ने स्वदेशी ब्रांड्स के विकास एवं कुशल मानव संसाधन तैयार करने की आवश्यकता बताई। सैक-इसरो के वैज्ञानिक श्री हरिशंकर गुप्ता ने सरकारी वित्तीय संसाधनों के प्रभावी एवं बहुआयामी उपयोग के लिए शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत समन्वय पर जोर दिया।
स्वदेश आईसी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी चंदर पाल ने कहा कि बुनियादी बौद्धिक संपदा और स्वदेशी विनिर्माण का विकास भारत को वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण होगा। वर्की के संस्थापक सावन लद्दा ने कहा कि भविष्य की तकनीकों में इंटीग्रेटेड सर्किट यानी आईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। डीप टेक की संस्थापक रिचा ने सेवा आधारित मॉडल से आगे बढ़कर स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विचार रखे।
सचिव मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास स्वतंत्र कुमार ने कहा कि भारत अब केवल असेंबली तक सीमित रहने से आगे बढ़कर डिजाइन और विनिर्माण की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज तथा सुगम परिवहन व्यवस्था को सेमी कंडक्टर उद्योग के अनुकूल बताया।
तृतीय पैनल : मध्यप्रदेश में जीसीसी एवं डिजाइन सेवाओं के विकास की रणनीतियाँ
तृतीय पैनल का संचालन ट्रूचिप सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन किशोर ने किया। चर्चा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अर्थात जीसीसी एवं डिजाइन सेवाओं के विस्तार के लिए प्रतिभा, अधोसंरचना, निवेश और बेहतर कनेक्टिविटी की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
क्वेस्ट ग्लोबल की उपाध्यक्ष सुमेधा लिमये ने कहा कि प्रतिभाओं की उपलब्धता के साथ उनकी प्रतिबद्धता और चुनौतियों के बीच निरंतर कार्य करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। मिराफ्रा के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक कुचलूस ने कहा कि उद्योगों के एक से अधिक केंद्र होने से चुनौतियों का सामना करने और संचालन की निरंतरता बनाए रखने की क्षमता बढ़ती है।
यूएसटी ग्लोबल के वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख मनीष बाली ने कहा कि प्रदेश में इस क्षेत्र के विकास के पर्याप्त अवसर हैं। डिजिकॉम सेमीकंडक्टर्स के प्रबंध निदेशक सौरभ ढींगरा ने प्रदेश के शहरों की बेहतर कनेक्टिविटी तथा अधोसंरचना एवं सहयोगी तंत्र विकसित करने के अनुकूल वातावरण को उद्योग के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
सुमन द्विवेदी ने कहा कि जीसीसी की स्थापना एवं सफल संचालन के लिए मजबूत अधोसंरचना और कुशल प्रतिभाएँ आवश्यक हैं। सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम जॉन किंग्सले ने कहा कि मध्यप्रदेश में जीसीसी एवं डिजाइन सेवाओं के विकास की असीम संभावनाएँ हैं। प्रदेश में उपलब्ध अधोसंरचना, औद्योगिक परिवेश, प्रतिभाओं का व्यापक समूह तथा राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थान इस क्षेत्र के विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
चतुर्थ पैनल : सेमी कंडक्टर क्षेत्र में संघ, सोसायटियों, परामर्शदाता कंपनियों एवं सार्वजनिक निकायों की भूमिका
चतुर्थ पैनल का संचालन एसटी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के प्रबंध निदेशक आनंद कुमार ने किया। विशेषज्ञों ने नीतिगत समन्वय, कौशल विकास, आपूर्ति शृंखला, निवेश एवं उद्योगों के संचालन से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
पंचम पैनल : चिप डिजाइन एवं सेमी कंडक्टर प्रौद्योगिकी के लिए प्रतिभा विकास एवं अनुसंधान
पंचम पैनल का संचालन इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत नाइलिट के महानिदेशक एम. एम. त्रिपाठी ने किया। उन्होंने आईएसएम 2.0 में प्रतिभा को सबसे महत्वपूर्ण घटक बताते हुए उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास पर जोर दिया।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर योगेश चौहान ने उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता बताई। ग्लोबलफाउंड्रीज के निदेशक देवेश द्विवेदी ने सेमी कंडक्टर क्षेत्र के लिए आवश्यक कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान पर विचार साझा किए। डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल के प्रोफेसर एलेक्स पी. जेम्स ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सोच और तैयारी को सेमी कंडक्टर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
वीएसआई के आई-टॉप्स की निदेशक सुश्री अपराजिता बनर्जी ने विद्यार्थियों को सेमी कंडक्टर क्षेत्र को करियर विकल्प के रूप में अपनाने और मूलभूत तकनीकी अवधारणाओं की समझ मजबूत करने का सुझाव दिया। मेवेन सिलिकॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिवकुमार पी. आर. ने मूलभूत शिक्षा, तकनीकी प्रणालियों की कार्यप्रणाली की समझ एवं उन्नत ज्ञान का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सेमी कंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर