मप्र में ई-विकास 2.0 से सुदृढ़ हुई उर्वरक वितरण प्रणाली, किसानों को मिली चयन की छूट
- प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त और प्रचुर भंडारण उपलब्ध
भोपाल, 19 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने खाद वितरण व्यवस्था को ई-विकास पोर्टल 2.0 से जोड़ दिया है, जिसके बाद अब किसानों को टोकन, ऑनलाइन अनुमति, व्हाट्सऐप बॉट और हेल्पलाइन जैसी सुविधाओं से खाद मिलने में आसानी होगी और 24 घंटे के भीतर खाद उपलब्ध करा दी जाएगी।
जनसम्पर्क अधिकारी अवंतिका जायसवाल ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि किसान-हितैषी प्राथमिकताओं के साथ 'ई-विकास 2.0' प्रभावी व्यवस्था प्रदेश के कृषकों को उनकी आवश्यकता एवं स्वेच्छा के अनुसार सहजता से उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 'ई-विकास 2.0' (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को संपूर्ण राज्य में क्रियान्वित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा विभिन्न किसान संगठनों, निजी विक्रेताओं तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त व्यावहारिक सुझावों को समाहित करते हुए इस नवीन पोर्टल को अत्यधिक सरल, पारदर्शी एवं सर्वसुलभ बनाया गया है। राज्य के समस्त डबल लॉक केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से अब इसी आधुनिक व्यवस्था के अंतर्गत उर्वरक का विक्रय सुनिश्चित किया जा रहा है।
उर्वरक क्रय प्रक्रिया में सरलीकरण और चयन की पूर्ण स्वतंत्रता
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, ई-विकास 2.0 प्रणाली के माध्यम से किसानों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी बंधन के उर्वरक क्रय करने की पूर्ण छूट प्रदान की गई है। कृषक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलवार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे अधिक उर्वरक प्रथम बार में ही प्राप्त कर सकेंगे। अतिरिक्त उर्वरक की माँग के लिए पूर्व में प्रचलित 50 शब्दों के विवरण की बाध्यता को समाप्त कर अब सुगम ड्रॉप-डाउन चयन की सुविधा जोड़ी गई है। इसके साथ ही, भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की गणना अब सीधे प्रति हैक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित हुई है।
असाधारण स्थितियों में त्वरित समाधान और त्वरित प्रशासनिक स्वीकृति
उन्होंने बताया कि फसल क्षति अथवा अन्य आपात् स्थितियों में कृषकों द्वारा पुनः उर्वरक की माँग के लिये एक्सेप्शनल हैंडलिंग प्रणाली को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी बनाया गया है। ऐसे सभी प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अथवा तहसीलदार द्वारा 48 घंटे की निर्धारित समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई कृषक ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद टोकन निरस्तीकरण का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है।
व्हाट्सऐप बॉट एवं नवीन तकनीकी सुविधाओं का समावेश
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, डिजिटल नवाचारों की दिशा में देश में पहली बार पहल करते हुए ई-विकास 2.0 पोर्टल में शीघ्र ही व्हाट्सएप बॉट सुविधा प्रारंभ की जा रही है। इसके अंतर्गत कृषक केवल अपने मोबाइल से व्हाट्सऐप पर 'हेल्प' अथवा 'मदद' लिखकर उर्वरक टोकन, अधिकृत रिटेलर, उर्वरक उपलब्धता, उठाव तिथि एवं टोकन की वैधता संबंधी संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर सुगमता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने के लिये आवश्यकतानुसार क्षमता वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
समस्या निवारण के लिये समर्पित हेल्पलाइन तथा विशेष राज्यव्यापी अभियान
कृषकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर +91-7880223344 एक्टिव किया गया है, जिस पर प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में सुबह 10:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, संपूर्ण प्रदेश में 20 अगस्त 2026 से एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी कृषकों की 'फार्मर आईडी' निर्मित करना, अग्रिम उर्वरक उठाव को प्रोत्साहित करना तथा पैक्स की सदस्यता का विस्तार करना है।
प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त और प्रचुर भंडारण उपलब्ध
राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त एवं निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.57 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 13.18 लाख मीट्रिक टन का उठाव कृषकों द्वारा किया जा चुका है तथा 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया वर्तमान में उपलब्ध है। इसी प्रकार, डीएपी एवं एनपीके की उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही, जिसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन के उठाव के बाद 4.20 लाख मीट्रिक टन का समृद्ध स्टॉक शेष है। इसके अतिरिक्त, 3.17 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) भी प्रदेश में वितरण के लिये पूरी तरह उपलब्ध है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर