समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की दिशा में व्यापक प्रयास जारी : कृषि मंत्री कंषाना

 


- समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की थीम हो रही साकार

भोपाल, 29 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि हमारे प्रदेश की आत्मा उसके किसान हैं और किसान का सशक्तिकरण ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। कृषक कल्याण वर्ष एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण है। इस कार्यक्रम की थीम समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश है।

कृषि मंत्री कंषाना ने रविवार को एक बयान में कहा कि किसानों की आय में वृद्धि, फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि एवं मजबूत विपणन तंत्र स्थापित करना, इस कार्यक्रम की मूल अवधारणा है। इस कार्यक्रम के फोकस क्षेत्र यथा आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करना है।

उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 की गतिविधियों के परिणाम स्वरुप कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समन्वित और सतत विकास सुनिश्चित होगा, जिससे ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगा। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन के माध्यम से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी, साथ ही बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकेंगे। प्रदेश समावेशी विकास के माध्यम से समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश की ओर अग्रसर हो रहा है।

मंत्री कंषाना ने कहा कि समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश की दिशा में प्रदेश में 10 बहुउद्देशीय आयामों को शामिल किया गया है। इन आयामों में कृषि क्षेत्र के साथ इससे जुड़े क्षेत्र जैसे उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता के क्षेत्र में भी नई सोच से कार्य प्रारंभ किये जाना शामिल किया गया है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 का हर आयाम समृद्ध किसान - समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

प्रथम आयामः कृषि बदलाव की बड़ी परियोजनाएं:- श्री-अन्न (मिलेट्स), चना और सरसों जैसी फसलों पर गहन शोध और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर जोर दिया गया है। साथ ही तिलहन भावान्तर व्यापीकरण, उड़द, मूंगफली, गन्ना क्षेत्र विस्तारण, ई विकास व्यापीकरण, उर्वरक अग्रिम भंडारण, पराली से उर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य सम्मिलित हैं।

द्वितीय आयामः किसान की आय वृद्धि एवं अपव्यय में कमी:- फसल विविधीकरण और 'प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन (मूल्य स्थिरीकरण)' पर केंद्रित है, ताकि आलू-प्याज-टमाटर जैसी फसलों के दाम गिरने पर भी किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें।

तृतीय आयामः प्राकृतिक एवं जैविक कृषि:- प्राकृतिक मध्यप्रदेश मिशन को समर्पित है, जहाँ रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

चतुर्थ आयामः जल, मृदा एवं कृषि आदान का अनुकूलन:- संसाधनों के इष्टतम उपयोग जैसे 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0' और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को शामिल किया गया है।

पंचम आयामः जलवायु, ऊर्जा एवं सततता:- कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना, एथेनॉल संयंत्र विस्तार, मध्यप्रदेश जैव-विविधता संरक्षण इत्यादि पर कार्यवाही इस आयाम के मुख्य आकर्षण हैं।

षष्ठम आयामः मूल्य श्रृंखला, बाज़ार एवं किसान हिस्सेदारी:- कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, e-NAM का मंडियों में विस्तार, स्वचालित मंडियां, मंडी ई-नीलामी नियम सुधार, भूमि उपयोग नीति इत्यादि शामिल हैं।

सप्तम आयामः निर्यात, ब्रांडिंग एवं वैश्विक उपस्थिति:- एमपी ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग एकीकृत कृषि निर्यात इकोसिस्टम, जीआई टैगिंग ड्राइव, मार्केटिंग व ब्रांडिंग नेटवर्क, बायर-सेलर मीट कार्यक्रम, कृषि निर्यात प्रोत्साहन व सुविधा योजना इत्यादि शामिल हैं।

अष्टम आयामः अनुसंधान, नवाचार एवं सशक्तिकरण:- 'एग्री-हैकाथॉन 2026', कृषि मंथनः लैब टू लैंड मिशन, कृषि अनुसंधान जैसे नवाचारों पर है।

नवम आयामः विरासत, संस्कृति एवं सॉफ्ट ब्रांडिंग:- विरासत मध्यप्रदेश, हेरिटेज मध्यप्रदेश, कृषि पर्यटन प्रोत्साहन कर विश्व पटल पर मध्यप्रदेश को पहचान दिलाना है।

दशम आयामः शासन, डिजिटल व्यवस्था एवं पारदर्शिता:- डिजिटल गवर्नेस और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिसमें एआई-आधारित कृषि परामर्श और क्यूआर कोड आधारित फार्म ट्रेसेबिलिटी शामिल है।

मंत्री कंषाना ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के कार्यक्रम की सफलता का एक बड़ा आधार इसके 'अलाइड सेक्टर्स' हैं। उद्यानिकी विभाग के द्वारा राज्य के सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र को एक लाख हेक्टेयर और बढ़ाया जाएगा। पशुपालन के क्षेत्र में नस्ल सुधार और संतुलित आहार के मंत्र के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की जाएगी। मछुआरों को कम ब्याज दर पर ऋण और अन्य वे सभी सुविधाएं मिल सकेंगी जो पारंपरिक किसानों को प्राप्त होती हैं। 'नील क्रांति' के तहत हर तालाब को रोजगार के संगम में बदलने की योजना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कृषक कल्याण वर्ष का शुभारम्भ 11 जनवरी को जम्बूरी मैदान भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में किया गया। इसी दिन भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की ऐतिहासिक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया। इस मेगा रैली एवं शुभारंभ कार्यक्रम में 30 हजार से अधिक किसान शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर