मप्र में नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये हो रहा निरंतर कार्य: प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन

 


- मप्र में राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने पर कार्यशाला संपन्न

भोपाल, 15 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने कहा कि प्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विभाग नागरिकों को अधिकाधिक डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन सोमवार को राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने पर भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न डिजिटल नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए नागरिकों के व्यक्तिगत, वित्तीय, भूमि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

प्रमुख सचिव सेल्वेन्द्रन ने कहा कि इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी की स्थापना की गई है, जो सायबर खतरों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई से प्रदेश की सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला सायबर सुरक्षा के लिए मजबूत संस्थागत एवं नीतिगत ढाँचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय एवं भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और मजबूत किया जाएगा।

एमपी-सीईआरटी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से सुदृढ़ हो रही सायबर सुरक्षा व्यवस्था: वशिष्ठ

एमपी राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (एमपीएसईडीसी) के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटली नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सायबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण का महत्व भी बढ़ा है। नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि एवं संपत्ति सहित विभिन्न शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।

वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर के सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से सायबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों के अनुभवों के आधार पर राज्य के लिए एक मजबूत, प्रभावी और भविष्य उन्मुख साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने में सहायता मिलेगी।

प्रदेश में 44 सायबर कमांडो और 3 हजार सायबर वॉरियर तैयार किए जाएंगे: एडीजी मनोहर

कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने कहा कि सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा आज डिजिटल युग की प्रमुख चुनौतियां हैं। सायबर हेल्पलाइन 1930, त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था और जागरूकता अभियानों के माध्यम से प्रदेश में सायबर अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे अनेक मामलों में नागरिकों की बड़ी राशि सुरक्षित कराई गई है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ शासकीय डेटा और प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से एमपी-सीईआरटी, आधुनिक निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सायबर जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

एडीजी मनोहर ने बताया कि प्रदेश में सायबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में 6 सायबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है। राज्य सायबर सेल में सिंहस्थ - 2028 से पहले 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे। सिंहस्थ में सायबर अटैक पर बारीकी से नजर रखने और उसे समय रहते प्रतिबंधित करने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों एवं युवा स्वयं सेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी उपाय हैं और राज्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया और अपने विचार भी व्यक्त किए। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सायबर अपराध नियंत्रण, आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन परियोजना के माध्यम से सायबर सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और एनआईसीनेट की सायबर सुरक्षा संरचना जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अतिरिक्त डिजिलॉकर, एंटिटी लॉकर, एपीआई सेतु एवं यूएक्स4जी, एंड-पॉइंट सुरक्षा, वेब एवं आईटी अवसंरचना की सायबर सुरक्षा स्थिति और सुरक्षित एआई परिवर्तन यात्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की सहभागिता से विषयगत समूह चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान सायबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर 5 समानांतर समूह गठित कर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।समूह चर्चाओं में जोखिम आधारित आकलन एवं सिक्योरिटी निगरानी, राज्य डेटा सेंटर (एसडीसी) एवं स्वान सुरक्षा, लेगेसी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, सुरक्षा-बाय-डिज़ाइन एवं ज़ीरो-ट्रस्ट मॉडल, डेटा वर्गीकरण एवं डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और सायबर सुरक्षा क्षमता निर्माण, जागरूकता और एमपी-सीईआरटी की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने अपने-अपने विभागों में सायबर सुरक्षा से संबंधित वर्तमान व्यवस्थाओं, प्रमुख चुनौतियों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अंतरालों और सुधार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। समूहों द्वारा राज्य शासन की डिजिटल परिसंपत्तियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएँ भी प्रस्तुत की गईं। चर्चा में सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में विभागीय समन्वय बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना विकसित करने और डेटा संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों और डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ विभिन्न विभागों के बीच सायबर सुरक्षा संबंधी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर