मप्र के उप मुख्यमंत्री देवड़ा के ओएसडी रहे दीपम रायचुरा निलंबित, एक करोड़ की रिश्वत का आरोप
भोपाल, 12 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी रहे दीपम रायचुरा को आबकारी विभाग ने निलंबित कर दिया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार रात निलंबन के आदेश जारी किए।
दो दिन पहले ही शराब दुकानों के टेंडर में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद रायचुरा को पहले ओएसडी पद से हटाया गया था। अब विभागीय जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की कथित फर्जी सावधि जमा रसीद (एफडीआर) स्वीकार करने और साझेदारी व लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया में गड़बड़ियां मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। रायचुरा पर भोपाल में दो शराब दुकानें दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप भी है।
रिश्वत के आरोपों का मामला करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के बयान के बाद सामने आया। गोगिया ने दावा किया था कि उसने रायचुरा को एक करोड़ रुपये दिए थे। उसके मुताबिक, 50 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।
बैंक ने एफडीआर जारी करने से किया इनकार
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने बताया कि शराब दुकान की सुरक्षा राशि के लिए एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की एफडीआर स्वीकार की गई थी। इस दस्तावेज पर 12 मई 2024 की तारीख अंकित थी और 20 मई को उसके सत्यापन का उल्लेख किया गया था। बाद में बैंक ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि उसने संबंधित एफडीआर जारी ही नहीं की थी। दस्तावेज के सत्यापन की जिम्मेदारी आबकारी उपनिरीक्षक वर्षा उइके की थी। जांच के दौरान उन्होंने बताया कि सत्यापन के लिए उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ था।
आबकारी आयुक्त के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर पर संबंधित बैंक शाखा का नाम दर्ज नहीं था। इसके बावजूद शराब दुकान के लाइसेंसी जसवंत के ईमेल से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट को मान्य कर लिया गया। विभागीय जांच में एफडीआर और उसकी सत्यापन रिपोर्ट, दोनों को फर्जी पाया गया।
सुरक्षा राशि जमा करने में देरी पर कार्रवाई नहीं
जांच में सुरक्षा राशि जमा करने से जुड़ी अनियमितता भी सामने आई। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा किए जाने थे। यह राशि 50 प्रतिशत सुरक्षा राशि के तौर पर जमा होनी थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा के 22 दिन बाद जमा की गई। इसके बावजूद देरी के मामले में संबंधित स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच के मुताबिक, दूसरी सुरक्षा राशि लिए बिना ही जमा रकम का समायोजन कर दिया गया। इस प्रक्रिया को भी विभागीय अनियमितताओं में शामिल किया गया है।
मेसर्स मां माइंस के शराब दुकान लाइसेंस के हस्तांतरण में भी प्रक्रिया संबंधी खामियां पाई गईं। जांच के अनुसार, हस्तांतरण के लिए निर्धारित राशि 10 जुलाई 2024 को प्राप्त हुई थी, जबकि इस संबंध में भोपाल कलेक्टर का आदेश 27 दिसंबर 2024 को जारी किया गया। जांच में पाया गया कि लाइसेंस हस्तांतरित करने से पहले आवश्यक साझेदारी विलेख (पार्टनरशिप डीड) प्राप्त नहीं किया गया था। कलेक्टर के आदेश में विजय सिंह को फर्म का भागीदार बताया गया, लेकिन पूरक साझेदारी विलेख में उनका नाम दर्ज नहीं था। इसके बावजूद उनके नाम से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार कर ली गई। यह बैंक गारंटी आईसीआईसीआई बैंक की नेहरू नगर, भिलाई शाखा से संबंधित थी और 15 जुलाई 2024 को जमा की गई थी। जांच के मुताबिक, विजय सिंह न तो मूल लाइसेंसधारी थे और न ही फर्म के भागीदार। फर्म से उनका कोई लिखित संबंध भी नहीं पाया गया।
व्यक्तिगत खाते के चेक स्वीकारने पर भी सवाल
जांच में विजय सिंह के व्यक्तिगत बैंक खाते से जुड़े चेक स्वीकार किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। इससे सरकारी राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति पर निर्भर हो गई, जिसका लाइसेंसी फर्म के साथ कोई कानूनी संबंध दर्ज नहीं था। विभागीय जांच में प्रताप धाकड़ और विजय सिंह को मेसर्स मां माइंस तथा बिलखरिया कंपोजिट शराब दुकान से जुड़े भागीदार या लाइसेंसी के रूप में दर्शाए जाने का मामला भी सामने आया। हालांकि, विजय सिंह का नाम साझेदारी विलेख में शामिल नहीं था।
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दीपम रायचुरा के निलंबन का आदेश जारी किया। रायचुरा जिला आबकारी अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के पद पर पदस्थ थे। इसके साथ ही वह राज्यस्तरीय उड़नदस्ते में प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर