दमोह: लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय पर भाजपा की प्रबुद्धजन संगोष्ठी आयोजित

 


दमोह, 30 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह में शुक्रवार को एक निजी होटल में भारतीय जनता पार्टी द्वारा लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय पर प्रबुद्धजन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, चिकित्सकों, सामाजिक प्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ दमोह विधायक जयंत मलैया, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे, शिक्षाविद डॉ. एन.आर. राठौर, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पी.एल. शर्मा, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष पं. विद्यासागर पांडे, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पांडे, भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय सेन, कार्यक्रम संयोजक मनीष सोनी एवं महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष वर्षा रैकवार ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया गया। आयोजन के दौरान शिक्षाविद डॉ. एन.आर. राठौर, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. पी.एल. शर्मा एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव पांडे का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के संयोजक मनीष सोनी ने संगोष्ठी के उद्देश्य और आयोजन की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने और उसके प्रति समाज को जागरूक करने में प्रबुद्ध वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जागरूक नागरिक अपने विचारों और अनुभवों के माध्यम से आमजन तक लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों को पहुंचा सकते हैं।

विधायक जयंत मलैया ने अपने संबोधन में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावों में पराजय के बाद चुनावी प्रक्रिया और विभिन्न संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति निर्मित करती है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत का समाधान संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत होना चाहिए। विधायक ने महंगाई, आर्थिक परिस्थितियों और देश की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की राजनीति की आलोचना की। दीपावली के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रस्तावित प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा। उन्होंने देश की आजादी से लेकर वर्तमान समय तक की राजनीतिक घटनाओं और आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के शासनकाल की नीतियों पर भी अपने विचार रखे।

भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि कांग्रेस कभी एसआईआर, कभी ईवीएम, कभी वोट चोरी और कभी चौकीदार चोर है जैसे नारों के माध्यम से लगातार राजनीतिक मुद्दे उठाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की राजनीति से चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों के मन में संदेह पैदा करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने राजनीतिक दलों की फंडिंग, आर्थिक सहयोग के स्रोतों और देश-विदेश से जुड़े संभावित प्रभावों के विषय पर भी विचार रखे। उन्होंने प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में जाकर आमजन को तथ्यों के आधार पर जागरूक करें और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सकारात्मक संवाद स्थापित करें।

भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय सेन ने भी संगोष्ठी को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे इंजीनियर अमर सिंह राजपूत ने कहा कि अराजकता का अर्थ केवल अव्यवस्था नहीं है, बल्कि जब समाज में नियमों, अनुशासन और स्थापित व्यवस्थाओं के प्रति सम्मान कमजोर होने लगता है, तब भी अराजक परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि देश की चुनौतियों को केवल बाहरी परिस्थितियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के भीतर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के प्रति भी सजग रहना आवश्यक है। सभी को मिलकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। संविधान का सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून का शासन, संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता के प्रति जवाबदेही लोकतंत्र के प्रमुख आधार हैं। किसी भी विषय पर भ्रम की स्थिति बनने पर तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से उसका समाधान किया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव