मप्र: दूषित पानी, जहरीली शराब और बच्चों की मौतों पर जीतू पटवारी ने सरकार से मांगा जवाब
भोपाल, 02 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में बच्चों की मौत, आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था, संदिग्ध जहरीली शराब और दूषित पेयजल की घटनाओं को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जहां लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, वहां जिम्मेदारी किसकी तय हुई और प्रभावित परिवारों को क्या राहत मिली।
जीतू पटवारी ने शुक्रवार काे राजधानी भाेपाल स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित मध्यप्रदेश दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रदेश के कई गंभीर मुद्दों पर सरकार को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक समन्वय, प्रदेश की वित्तीय स्थिति और सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल उठाए।
बालाघाट के आदिवासी परिवारों का मुद्दा उठाया
जीतू पटवारी ने लाेकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की। उन्होंने सरकार से आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित बजट के उपयोग का मदवार विवरण सार्वजनिक करने को कहा। पटवारी का कहना था कि स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल
पीसीसी चीफ पटवारी ने बालाघाट दौरे के दौरान जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, दौरे की पूर्व सूचना के बावजूद दोनों अधिकारियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक समन्वय और प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को सक्षम मंचों पर उठाएगी और तथ्यों के आधार पर शिकायत तथा विधानसभा में विशेषाधिकार से जुड़े विषय रखने की बात कही।
सरकार के भीतर समन्वय पर भी निशाना
पटवारी ने मंत्रियों और अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर सामने आई विभिन्न खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों के बीच संवाद तथा निर्णय प्रक्रिया में किसी तरह की समस्या है तो उसका समाधान होना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। उन्होंने विभिन्न मंत्रियों और अधिकारियों से जुड़े हाल के विवादों का उल्लेख करते हुए इन मामलों की नियमों के अनुरूप समीक्षा की मांग की।
कर्ज और सरकारी खर्च पर मांगा हिसाब
प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर जीतू पटवारी ने सरकार से कुल सार्वजनिक कर्ज, नए ऋण, ब्याज भुगतान और कर्ज से किए गए खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने एक महीने में तीन बार कर्ज लेने और प्रदेश का कुल कर्ज करीब चार लाख करोड़ रुपए होने का दावा करते हुए सरकार से इसके आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए विमान और हेलीकॉप्टर सहित सरकारी सुविधाओं पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। पटवारी ने कहा कि सरकार को अपने खर्च की प्राथमिकताओं और विकास कार्यों पर किए जा रहे निवेश का पारदर्शी विवरण देना चाहिए।
तीन घटनाओं का उल्लेख कर जवाबदेही की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत से जुड़े कफ सिरप मामले, सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों और इंदौर में दूषित पेयजल की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मामलों में जांच की स्थिति, जिम्मेदार विभागों की भूमिका और प्रभावित परिवारों को दी गई सहायता की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा मामले में दवा की गुणवत्ता और नियामकीय निगरानी, सागर मामले में अवैध शराब की आपूर्ति और निगरानी तथा इंदौर मामले में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था की जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अमित शाह के सामने छह सवाल रखने की बात
पटवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सामने छह प्रमुख मुद्दे रखने की बात कही। इनमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच प्रशासनिक समन्वय, छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत, सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतें, आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य-पोषण एवं शिक्षा, इंदौर की दूषित पेयजल घटना और प्रदेश के बढ़ते कर्ज का मुद्दा शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इन मामलों में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जहां जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आए, वहां नियमानुसार कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे