मप्र में तैयार होगी व्यापक एवं वित्तीय रूप से टिकाऊ ‘सड़क अनुरक्षण नीति’
- नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित, 30 अक्टूबर तक प्रस्तुत होगा अंतिम प्रारूप
भोपाल, 23 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की सड़क परिसंपत्तियों का प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं दीर्घकालिक अनुरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा व्यापक, व्यावहारिक एवं वित्तीय रूप से टिकाऊ ‘सड़क अनुरक्षण नीति’ तैयार की जाएगी। इसके लिए विभाग ने नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि समिति में मुख्य अभियंता (एनएच जोन), मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग को समन्वय सदस्य, धर्मवीर सिंह, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी मुंबई को तकनीकी विशेषज्ञ एवं सदस्य, मुख्य अभियंता (बी/आर), लोक निर्माण विभाग, भोपाल परिक्षेत्र को सदस्य, एमपीआरडीसी द्वारा नामित मुख्य अभियंता को सदस्य, वित्तीय सलाहकार, लोक निर्माण विभाग को सदस्य, मैदानी स्तर से एक अनुभवी अधीक्षण यंत्री अथवा कार्यपालन यंत्री को सदस्य, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई द्वारा नामित एमओआरटीएच/एनएचएआई प्रतिनिधि को सदस्य, सड़क सुरक्षा अथवा गुणवत्ता नियंत्रण विंग के प्रतिनिधि को सदस्य और समिति द्वारा सुविधानुसार नामांकित एक सेवानिवृत्त अभियंता को सदस्य के रूप में नामांकित किया गया है।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, समिति विगत चार वर्षों में सड़क अनुरक्षण से संबंधित जारी सभी निर्देशों, परिपत्रों, दिशा-निर्देशों, विनिर्देशों, अनुरक्षण प्रक्रियाओं और नीतिगत निर्देशों का व्यापक परीक्षण करेगी। नीति तैयार करते समय नियमित एवं आवधिक अनुरक्षण, डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड, परफॉर्मेंस बेस्ड मेंटेनेंस, गुणवत्ता निगरानी, सड़कों की स्थिति का आकलन, अनुरक्षण कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करने तथा वित्तीय प्रावधान एवं फंडिंग व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाएगा।
समिति मैदानी आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, तकनीकी मानकों और वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए सड़क अनुरक्षण नीति का प्रारूप तैयार करेगी। नीति में स्पष्ट मानक, उत्तरदायित्व, समय-सीमा, निगरानी व्यवस्था और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।
निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार समिति 30 सितम्बर तक कार्य प्रारंभ करेगी। नीति का प्रथम प्रारूप 15 अक्टूबर तक प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सड़क अनुरक्षण नीति का अंतिम प्रारूप 30 अक्टूबर तक प्रस्तुत किया जाएगा। इस संबंध में जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर