मप्र में मुख्यमंत्री ने दी ग्वालियर को बड़ी सौगात : पशुओं के लिए वेलनेस सेंटर, डबरा में नया अस्पताल
भोपाल, 04 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर और डबरा क्षेत्र के पशुपालकों के लिए चार मई का दिन विशेष रहा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पशु स्वास्थ्य और डेयरी विकास को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। ग्वालियर में अत्याधुनिक पशु वेलनेस सेंटर और डबरा में नए पशु चिकित्सालय की स्थापना की घोषणा से अब पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। यह पहल एक ओर जहां पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी, वहीं दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी।
राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में सोमवार को ग्वालियर पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वेलनेस सेंटर में पशुओं के इलाज के साथ-साथ पशु आहार निर्माण की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण चारा स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और आय में वृद्धि होगी।उन्होंने गौ-सेवा को सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है और इसकी सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के उदाहरण देते हुए गौ-पालन के महत्व को रेखांकित किया।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ग्वालियर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर वीरता, सेवा और समर्पण की भूमि है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों और पशुपालकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। अब किसान केवल फसल पर निर्भर नहीं है, बल्कि दुग्ध उत्पादन के माध्यम से भी नियमित आय अर्जित कर रहा है। सरकार ने 25 गायों के पालन की योजना पर 10 लाख रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया है, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है और सरकार का लक्ष्य इसे “दूध की राजधानी” बनाना है। ग्वालियर-मुरैना क्षेत्र को उन्होंने दुग्ध उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया, जहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन होता है। सरकार न केवल दूध खरीदेगी, बल्कि पशुपालकों को उसका उचित मूल्य भी सुनिश्चित करेगी।
पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए सरकार द्वारा गौ-एंबुलेंस सेवा भी शुरू की गई है, जिससे बीमार पशुओं को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। इसके अलावा गौशालाओं को मिलने वाली सहायता राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गाय कर दिया गया है, ताकि पशुओं के चारे और देखभाल में कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदेगी। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में बिजली, पानी और सड़कों की बेहतर व्यवस्था के कारण कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए विभिन्न राजनीतिक मुद्दों का उल्लेख किया, लेकिन उनका मुख्य फोकस किसान और पशुपालकों के विकास पर ही रहा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
अंत में मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में पशु वेलनेस सेंटर, पशु आहार निर्माण इकाई, हेमसिंह परेड अस्पताल के उन्नयन और डबरा में नए पशु चिकित्सालय के निर्माण की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से निश्चित रूप से पशुपालन क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री लखन पटेल ने भी विभाग की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रतिदिन 9 लाख लीटर दूध का संग्रह होता था, वह अब बढ़कर 12.5 लाख लीटर हो गया है। आने वाले वर्षों में इसे 50 लाख लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों की आय में हजारों करोड़ रुपये की वृद्धि होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी