राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस पर मुख्यमंत्री ने किया प्रदेशवासियों से सुरक्षा के प्रति सजग रहने का आह्वान

 




भोपाल, 04 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी नागरिकों से जीवन के हर क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का पालन करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की सामूहिक जागरूकता और जिम्मेदारी से ही एक सुरक्षित, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सुरक्षा केवल कार्यस्थलों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को कार्यस्थलों पर सतर्कता, स्वास्थ्य के प्रति सजगता, पर्यावरण संरक्षण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी लोग मिलकर सुरक्षा के नियमों और मानकों का पालन करते हैं, तब दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है और विकास की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि समाज के सभी वर्ग सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर जिम्मेदारी निभाएं, तो न केवल दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है बल्कि एक सुरक्षित और प्रगतिशील समाज की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत सहित कई देशों में हर वर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (नेशनल सेफ्टी काउंसिल) द्वारा किया जाता है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपायों को प्रोत्साहित करना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का प्रमुख उद्देश्य लोगों में सुरक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा करना भी है। इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों और संगठनों द्वारा कार्यशालाएं, सेमिनार और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से लोगों को संभावित खतरों और जोखिमों के बारे में जानकारी दी जाती है। इससे व्यक्ति अपने दैनिक जीवन और कार्यस्थल पर आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए प्रेरित होते हैं।

दुर्घटनाओं की रोकथाम भी इस दिवस का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। लोगों को यह बताया जाता है कि औजारों और उपकरणों का सही उपयोग, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन और सतर्कता अपनाने से कई प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।जब व्यक्ति संभावित जोखिमों को पहले ही पहचान लेते हैं, तो वे समय रहते उचित सावधानियां भी अपना सकते हैं।

सुरक्षित कार्य वातावरण का सीधा संबंध उत्पादकता से भी होता है। जब कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित महसूस करते हैं, तो वे अधिक एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ अपने कार्यों को पूरा कर पाते हैं। इससे न केवल कार्यकुशलता बढ़ती है बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी ऊंचा रहता है और संस्थानों को बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस, सुरक्षा नियमों और मानकों के पालन के महत्व को भी रेखांकित करता है। कंपनियों और संस्थानों को अपने उद्योग से संबंधित सुरक्षा दिशानिर्देशों को लागू करने और उनका सख्ती से पालन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और संभावित कानूनी जटिलताओं से भी बचाव होता है।

इसके साथ ही इस दिवस पर आपातकालीन तैयारियों पर भी विशेष जोर दिया जाता है। प्राथमिक चिकित्सा, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे लोग संकट की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बन सकें।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी