आदि उत्सव जनजातीय गौरव, संस्कृति और उद्यमिता का संगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
- मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी रामनगर में दो दिवसीय आदि उत्सव का भव्य शुभारंभ, वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री
भोपाल, 15 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंडला जिले की ऐतिहासिक नगरी रामनगर में शुक्रवार को दो दिवसीय आदि उत्सव- का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पिछले एक दशक से यह आयोजन जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह हमारी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैभवशाली विरासत को सहेजने के साथ-साथ आधुनिक उद्यमिता के माध्यम से उसे नए आयाम देने का सशक्त मंच बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो होली और दीपावली एक साथ आ गई हों। उन्होंने मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी, उमरिया और छिंदवाड़ा अंचल से पहुंचे गोंड एवं बैगा समाज के भाई-बहनों का वर्चुअल स्वागत करते हुए आयोजन की भव्यता की सराहना की।
उन्होंने कहा कि आदि उत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विरासत से विकास” के संकल्प को साकार करने वाला आयोजन है। उन्होंने कहा कि मंडला का गोंड आर्ट, कर्मा, सैला और रीना नृत्य तथा बैगा समाज का परधोनी नृत्य जनजातीय संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए विशेष अभियान चलाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि उत्सव ने वर्ष 2016 से निरंतर आयोजन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और यह आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। उन्होंने यहाँ उपस्थित कलाकारों, कारीगरों और उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा जनजातीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई पहचान दे रही है। यह उत्सव जनजातीय बोली-भाषाओं को सहेजकर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। मंडला की गोंडी और बैगा मातृबोलियों के संरक्षण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मांदल, गुदुम बाजा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों और खगला जैसे पारंपरिक आभूषणों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य भी इस आयोजन के माध्यम से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय महापुरुषों और वीर नायकों बिरसामुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, दलपतशाह की शौर्य गाथाओं का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी मंच भी है। अपनी जड़ों से जुड़ने और जनजातीय महापुरुषों के वंशजों का सम्मान करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है तथा यह आयोजन जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
उन्होंने इस आयोजन के लिए लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते तथा सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों द्वारा राज स्तम्भ में ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्वलन भी किया गया। साथ ही मोतीमहल परिसर में स्थित शिलालेख पर जनजातीय संस्कृति की परंपरा अनुसार पूजन किया गया।
समारोह में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओरांव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके ने कहा कि रामनगर का ‘आदि उत्सव’ अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और गौरव के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गोंडी बोली में करते हुए जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। मंत्री उइके ने कहा कि रामनगर स्थित मोती महल किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर और गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यह स्थल गोंडवाना इतिहास, संस्कृति और शौर्य की अनेक स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से यहां आकर्षक एवं भव्य आयोजन करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि ‘आदि उत्सव’ की शुरुआत वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के विशेष प्रयासों से की गई थी। आज यह आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसमें जनजातीय संस्कृति, लोक कला, परंपराओं और इतिहास का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है। यह आयोजन आने वाली भावी पीढ़ियों को समर्पित है, ताकि युवा अपनी जड़ों, विरासत और इतिहास को समझ सकें। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और परंपराओं को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है। हमारी सांस्कृतिक पहचान ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और ‘आदि उत्सव’ उसी पहचान को सशक्त करने का माध्यम बन रहा है।
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर आज तक राज परिवार, पंडा, पुजारी एवं भूमका समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा राज परिवार के सदस्यों का कोया फूलमाला एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। साथ ही जनजातीय प्रतिभाओं का भी सम्मान मंच से किया गया। इसमें पद्यश्री से सम्मानित अर्जुन सिंह धुर्वे, भज्जू सिंह श्याम, ऊषा वागले शामिल रहे। इसके अलावा खेलो इंडिया एवं खेलो एमपी, कक्षा दसवी एवं कक्षा बारहवी में प्रदेश के मेरिट में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, विधायक कमलेश शाह, नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश तेकाम, वरिष्ठ समाजसेवी प्रफुल्ल मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीरज मरकाम, पंकज तेकाम, कामिनी शाह, श्रवण परते, सरपंच सकुन मरावी, सरपंच विमला उइके, देश के अन्य हिस्सों से आए 24 राज परिवार के सदस्य मंचासीन थे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर