भोपाल: अम्बेडकर सेतु को लेकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, मरम्मत का पूरा खर्च ठेकेदार से होगा वसूल
- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, ठेकेदार की लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
भोपाल, 05 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग ने भोपाल में 154 करोड़ रुपये लागत से बने अम्बेडकर सेतु को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने कहा है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और ठेकेदार की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होगी। अंबेडकर सेतु की मरम्मत का खर्च ठेकेदार से वसूला जाएगा।
विभाग ने शनिवार को बताया कि भोपाल शहर में गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक निर्मित फ्लाईओवर (अम्बेडकर सेतु) की मरम्मत एवं संधारण पर होने वाला संपूर्ण व्यय संबंधित ठेकेदार संस्था मेसर्स वी.के.एस.सी. इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, भोपाल से अनुबंध की शर्तों के अनुसार वसूल किया जाएगा। मरम्मत की वास्तविक लागत के साथ ही उस पर 20 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि भी ठेकेदार संस्था से वसूली जाएगी। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा न तो कोई पृथक बजट आवंटित किया गया है और न ही विभाग पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
विभाग के अनुसार, अम्बेडकर सेतु का निर्माण 31 दिसंबर 2024 को पूर्ण किया गया था। अनुबंध के अनुसार कार्य की दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) 30 दिसंबर 2029 तक निर्धारित है। इस अवधि में निर्माण अथवा संधारण से संबंधित कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार संस्था की है। फ्लाईओवर के निर्माण के बाद इसकी बियरिंग कोट में खराबी सामने आई थी, जिसका सुधार ठेकेदार संस्था द्वारा कराया गया था। वर्तमान वर्षाकाल में बियरिंग कोट में पुनः खराबी परिलक्षित होने के साथ ही संधारण से जुड़ी अन्य कमियां भी सामने आईं।
निरीक्षण के दौरान फ्लाईओवर के ड्रेनेज स्पाउट तथा रेनवॉटर डाउनटेक पाइपों के चोक एवं क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्षाजल की निकासी बाधित पाई गई। इसके कारण कुछ स्थानों पर वर्षाजल सीधे सड़क पर गिर रहा था। एक्सपेंशन जॉइंट से जल रिसाव, फ्लाई ओवर के नीचे स्थित सर्विस रोड पर जलभराव, गड्ढों का निर्माण तथा कुछ स्थानों पर पानी रुकने जैसी समस्याएं भी सामने आईं। विभाग द्वारा इन सभी कमियों को सूचीबद्ध करते हुए ठेकेदार संस्था को समय-सीमा में सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए गए।
लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार संस्था को 31 जुलाई 2026 तथा पुनः 11 अगस्त 2026 को आवश्यक सुधार एवं संधारण कार्य कराने के निर्देश जारी किए थे। अनुबंध की शर्तों के अनुसार ठेकेदार संस्था को 15 दिवस के भीतर सभी कमियां दूर करनी थीं, लेकिन निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार कार्य पूर्ण नहीं किया गया।
अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार संस्था द्वारा निर्धारित समय में सुधार कार्य नहीं किए जाने की स्थिति में विभाग को संबंधित कार्य उसके हर्जे-खर्चे पर कराने का अधिकार है। इसके तहत कार्य पर होने वाली संपूर्ण लागत तथा उस लागत पर 20 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि ठेकेदार संस्था से वसूल की जाती है। इन्हीं प्रावधानों के अंतर्गत विभाग द्वारा अम्बेडकर सेतु की खामियां दूर करने के लिए 4.69 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की गई थी। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा पृथक से कोई बजट, अतिरिक्त आवंटन अथवा अतिरिक्त व्यय प्रस्तावित नहीं किया गया है।
डीएलपी अवधि में विभाग के पास ठेकेदार संस्था की परफॉर्मेंस गारंटी की बैंक गारंटी जमा रहती है। विभाग द्वारा संधारण का कार्य इसी परफॉर्मेंस गारंटी की राशि को जब्त कर उससे कराया जाना प्रावधानित किया गया था।
ठेकेदार संस्था द्वारा फ्लाई ओवर पर कुछ आंशिक सुधार कार्य किए जाने के साथ ही विभाग की नवीन निविदा प्रक्रिया के विरुद्ध मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका प्रस्तुत की गई। उच्च न्यायालय ने फिलहाल विभाग द्वारा जारी नवीन निविदा प्रक्रिया पर स्थगन दिया है। साथ ही ठेकेदार संस्था को फ्लाई ओवर की सभी कमियां दूर करने तथा किए गए सुधार कार्यों का पालन प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
संधारण कार्य में लापरवाही बरतने के कारण ठेकेदार संस्था के पंजीयन को ब्लैक लिस्ट में दर्ज करने के संबंध में विभाग द्वारा 11 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। ठेकेदार संस्था द्वारा नोटिस के उत्तर में प्रस्तुत जवाब का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है एवं विस्तृत उत्तर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की कार्यवाही की जा रही है।
विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण कार्य के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया है कि किसी भी एजेंसी द्वारा किया गया खराब एवं गुणवत्ताहीन कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर