भोपालवासियों को ई-बसों में सफर के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार....टिकटिंग सिस्टम बना देरी का कारण
भोपाल, 27 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में शुरू होने जा रही इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) का अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) ने अपनी योजना में बदलाव करते हुए आज (27 जुलाई) से प्रस्तावित यात्रियों के साथ ई-बसों का ट्रायल रन फिलहाल टाल दिया है।
दरअसल, शहर की सड़कों पर 20 जुलाई से ई-बसों का ट्रायल रन जारी है, लेकिन ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम की टेस्टिंग पूरी नहीं होने के कारण अभी यात्रियों को इन बसों में सफर की अनुमति नहीं दी गई है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) का कहना है कि सभी तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद एक अगस्त से बसों का कमर्शियल संचालन शुरू होने की संभावना है। हालांकि, औपचारिक लोकार्पण 15 अगस्त को प्रस्तावित है।
बीसीएलएल अधिकारियों के मुताबिक ई-बसों में लागू किए जा रहे ऑनलाइन टिकटिंग सॉफ्टवेयर की अंतिम जांच जारी है। इस प्रक्रिया में करीब दो दिन और लग सकते हैं। तकनीकी परीक्षण सफल होने के बाद बसों को यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। संभावना है कि एक अगस्त से पहले भी संचालन शुरू किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला टेस्टिंग पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
बीसीएलएल की सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि शहर के दो रूटों पर अभी ई-बसों का ट्रायल रन किया जा रहा है। अभी दो दिन और बिना यात्रियों के ही ट्रायल रन चलेगा। इसके बाद दोनों रूटों पर यात्रियों के साथ ट्रायल रन शुरू किया जाएगा और इस दौरान यात्रियों को निर्धारित टिकट लेकर ही यात्रा करनी होगी।
गौरतलब है कि राजधानी भोपाल में 245 ई-बसें चलाने की तैयारी है। इसमें पहले चरण में 100 बसें पीएम ई-बस सेवा वाली होंगी और 145 बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) की होंगी। वर्तमान में पीएम बस सेवा वाली 100 में से 21 बसें भोपाल आ गई हैं। बसों के रूट भी तय हो गए हैं। अभी तक 12 रूट फाइनल हुए हैं। इसमें सबसे बड़ा रूट 68.5 किमी लंबा सीहोर से रातापानी का होगा, जबकि सबसे छोटा रूट 28 किमी का कोच फैक्ट्री से गोल-जोड़ तक का रहेगा। साथ ही ई-बसों के लिए दो डिपो बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर फाइनल किए गए हैं।
बीसीएलएल अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में दो रूटों पर ही बसों का परीक्षण किया जाएगा। पहला रूट चिरायु अस्पताल से बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़-चिचली तक रहेगा, जबकि दूसरा रूट चिरायु अस्पताल से बोर्ड ऑफिस मेट्रो स्टेशन होते हुए रेलवे कोच फैक्ट्री तक संचालित होगा। इन दोनों रूटों पर 10 ई-बसें चलाई जाएंगी। ट्रायल के दौरान बसों के संचालन, यात्री भार और समय-सारिणी का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद अगस्त में नियमित संचालन शुरू करने की तैयारी है।
180 किमी प्रतिदिन दौड़ेंगी बसें और आधुनिक सुविधाएं
अनुबंध के अनुसार प्रत्येक ई-बस का प्रतिदिन कम से कम 180 किलोमीटर संचालन अनिवार्य होगा। बस ऑपरेटर को 58.14 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाएगा, जिसमें 22 रुपये प्रति किलोमीटर केंद्र सरकार और 36.14 रुपये प्रति किलोमीटर राज्य सरकार वहन करेगी।
ई-बसों में एयर कंडीशनिंग, एआईएस-140 जीपीएस आधारित रियल टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग, मोबाइल ऐप से पास बनाने की सुविधा, पांच सीसीटीवी कैमरे, एआई आधारित पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम, पैनिक और स्टॉप बटन, एलईडी यात्री सूचना प्रणाली, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम तथा दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमैटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
प्रमुख स्वीकृत रूट
- सीहोर से रातापानी: 68.5 किमी
- फंदा से मंडीदीप: 65.3 किमी
- बिलखिरिया से सीहोर: 61.5 किमी
- परवलिया सड़क से औबेदुल्लागंज: 56.8 किमी
- सीहोर से कटारा बायपास तिराहा: 53.7 किमी
- अटल बिहारी यूनिवर्सिटी से आरआरएफ कैंप बगरोदा: 50.6 किमी
- सूखी सेवनिया से भोजपुर: 49 किमी
- औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा से बिलकिसगंज: 41.8 किमी
- कोच फैक्ट्री से औबेदुल्लागंज: 41.3 किमी
- फंदा से आईबीडी रॉयल सलैया: 40.2 किमी
- औद्योगिक क्षेत्र अचारपुरा से बीडीए कालोनी: 32 किमी
- कोच फैक्ट्री से गोल-जोड़: 28 किमी
यात्रियों की सुरक्षा के लिए एआई और सीसीटीवी
ई-बसों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए कई आधुनिक तकनीकें शामिल की गई हैं। बसों में डिजिटल टिकटिंग के साथ मोबाइल ऐप के जरिए पास बनाने की सुविधा होगी। हर बस में पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। दोनों दरवाजों पर एआई आधारित यात्री गिनने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा इमरजेंसी, पैनिक और स्टॉप बटन, हर खिड़की पर आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल होने वाले हैमर, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और एलईडी यात्री सूचना प्रणाली भी मौजूद रहेगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए खास सुविधा
ई-बसों में दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमैटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्ट भी लगाई गई है। इससे व्हीलचेयर से सफर करने वाले यात्रियों को बस में चढ़ने और उतरने में आसानी होगी। यात्रियों के साथ ट्रायल पूरा होने के बाद 15 अगस्त को ई-बस सेवा के आधिकारिक शुभारंभ की तैयारी है। ई-बसों का पूरा नेटवर्क शुरू होने के बाद भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
21 बसें पहुंचीं, 20 और आएंगी
निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी और एमआईसी मेंबर मनोज राठौर ने बताया कि भोपाल में अब तक 21 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं। अगले 10 से 12 दिन में 20 और नई बसें आने की उम्मीद है। इसके बाद शहर में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और बढ़ जाएगा। बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में चार्जिंग व्यवस्था भी तैयार कर ली गई है। यहां 11 चार्जर पाइंट लगाए जा चुके हैं, ताकि नियमित संचालन शुरू होने के बाद बसों को चार्जिंग की समस्या का सामना न करना पड़े। ट्रायल सफल होने के बाद यात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर