भोपालः नेशनल लोक अदालत में 18,086 प्रकरणों का निराकरण, 88.68 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित
भोपाल, 12 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के भोपाल में शनिवार को आयोजित जिला न्यायालय परिसर में आयोजित वर्ष की तृतीय नेशनल लोक अदालत में राजीनामा एवं आपसी सहमति के आधार पर कुल 18,086 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें 5,146 लंबित प्रकरण तथा 12,940 प्री-लिटिगेशन प्रकरण शामिल हैं। निराकृत मामलों में कुल 88 करोड़ 68 लाख 9 हजार 922 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भोपाल के अध्यक्ष मनोज कुमार श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित की।
लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय भोपाल, कुटुंब न्यायालय भोपाल, सिविल न्यायालय बैरसिया एवं औद्योगिक न्यायालय में कुल 57 खंडपीठों का गठन किया गया था। लोक अदालत में चेक बाउंस के 589, मोटर दुर्घटना दावा के 707, आपराधिक राजीनामा योग्य 776, पारिवारिक 148, बैंक रिकवरी के 479, व्यवहार वाद के 65, विद्युत अधिनियम के 1,805, श्रम विभाग से संबंधित 18 तथा जलकर एवं संपत्ति कर से संबंधित 9,974 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा ट्रैफिक से संबंधित 743, अन्य 1,634, आर्बिट्रेशन 27, प्लीड बार्गेनिंग 46 तथा राजस्व के 1,075 प्रकरण भी निराकृत किए गए।
इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश राजर्षि श्रीवास्तव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अग्नीध्र कुमार द्विवेदी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, एडीएम पी.सी. शाक्य, मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य राजेश व्यास, अभिभाषक संघ के अध्यक्ष देवेंद्र रावत, सचिव मुकेश नागपुरे, जिला विधिक सहायता अधिकारी मुहम्मद जीलानी सहित न्यायाधीशगण, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, बैंक एवं विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, अधिवक्ता तथा न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे।
सड़क दुर्घटना के मामले में 34.50 लाख रुपये में समझौता
लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में महत्वपूर्ण समझौता हुआ। दिव्यांश पटवारी की 25 नवंबर 2023 को दिल्ली में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी माता मंजू पटवारी एवं परिजनों ने मोटर यान अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति के लिए दावा प्रस्तुत किया था।
लोक अदालत में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा 34 लाख 50 हजार रुपये में समझौता किया गया। समझौते के बाद आवेदक को राशि का चेक प्रदान किया गया।
लोक अदालत में फिर साथ रहने को तैयार हुए दंपती
लोक अदालत में पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में भी उल्लेखनीय सफलता मिली। आपसी विवाद एवं वैमनस्य के चलते कई दंपती न्यायालय पहुंचे थे। सुलह एवं समझाइश के प्रयासों के बाद 12 सितंबर को आयोजित लोक अदालत में संबंधित पक्षकारों ने आपसी मतभेद समाप्त कर पुनः साथ रहने की सहमति दी। एक मामले में 22 जनवरी 2022 को विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच वैचारिक एवं पारिवारिक मतभेद उत्पन्न हो गए थे। पत्नी अलग रहने लगी थी। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की काउंसलिंग एवं सुलह के प्रयास किए गए।
लोक अदालत में दोनों पक्ष प्रसन्नतापूर्वक साथ रहने के लिए सहमत हुए। इसी तरह वर्ष 2025 से लंबित दो अन्य पारिवारिक मामलों में भी लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों के बीच समझौता कराया गया। एक मामले में 12 मार्च 2004 को विवाहित दंपती, जिनके दो पुत्र हैं, आपसी मतभेद के कारण पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय पहुंचे थे। सुलह के प्रयासों के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई और उनका विवाद समाप्त हुआ।
लोक अदालत की सफलता में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, न्यायालयीन कर्मचारियों, नगरीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, विद्युत विभाग, बैंकों तथा पक्षकारों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर