ऐतिहासिक भोजशाला में हुआ सत्याग्रह, विहिप उपाध्यक्ष ने की मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से वापस लाने की मांग
धार, 12 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में हर बार की तरह इस मंगलवार को भी हिन्दू समाज द्वारा नियमित सत्याग्रह किया गया। इस दौरान भोजशाला परिसर में हवन, पूजन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।
सत्याग्रह में मां सरस्वती का पूजन-वंदन, हनुमान चालीसा का पाठ एवं मां वाग्देवी की आरती की गई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की प्रांत उपाध्यक्ष माला सिंह ठाकुर भी इस सत्याग्रह में शामिल हुईं। उन्होंने मां वाग्देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उपस्थित लोगों को संबोधित किया और सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को जल्द भारत लाया जाए, भोजशाला की पुनर्प्रतिष्ठा कर इसका भव्य जीर्णोद्धार किया जाए और भोजशाला परिसर को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1034 में राजा भोज ने यहां मां वाग्देवी की स्थापना की थी। यहां मौजूद आकृतियां और स्थापत्य स्पष्ट रूप से हिंदू संस्कृति को दर्शाते हैं। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के आदेश पर 100 दिनों तक चले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वे में सामने आए साक्ष्य इस स्थान को सरस्वती मंदिर साबित करते हैं।
विहिप उपाध्यक्ष माला सिंह ठाकुर ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि हिंदू समाज को अपने ही आराध्य स्थल के लिए सत्याग्रह कर न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज न्यायालय का पूरा सम्मान करता है और इस मामले में आने वाले अंतिम फैसले की प्रतीक्षा कर रहा है।
गौरतलब है कि भोजशाला में प्रति मंगलवार को हिंदू समाज को पूजा की अनुमति प्राप्त है। हिंदू पक्ष का कहना है कि भोजशाला परिसर में मां वागदेवी यानी सरस्वती माता का मंदिर है, जिसे 11वीं सदी में परमार राजा ने बनवाया था। वहीं, जबकि शुक्रवार को यहां मुस्लिम समाज द्वारा नमाज अदा की जाती है। मुस्लिम समाज भोजशाला को मस्जिद मानता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर