मप्र के बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित 100 गांवों के सर्वांगीण विकास की कार्ययोजना तैयार
- 100 ग्रामों में 225 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से होंगे विकास कार्य
- सड़क, सिंचाई, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर
भोपाल, 27 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब नक्सल प्रभावित रहे गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिले के 100 चिन्हित गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वन उपज आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जनसम्पर्क अधिकारी अनिल पटले ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के बैगा जनजाति बहुल एवं पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों का भ्रमण कर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लोगों से संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने इन क्षेत्रों के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की थी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस पहल का उद्देश्य लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे गांवों में विकास की गति तेज करना, ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा स्थानीय युवाओं एवं परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका के स्थायी अवसर विकसित करना है।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा के क्रियान्वयन के लिए बालाघाट जिला प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इसके अंतर्गत चिन्हित 100 गांवों में उपलब्ध सुविधाओं, विकास की आवश्यकताओं और ग्रामीणों की समस्याओं का आकलन किया जा रहा है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से सीधे संवाद करने तथा उनकी जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन ग्रामों में 225 करोड़ रुपये की राशि के अलावा विभिन्न विभागों द्वारा विभागीय मद की राशि से भी विकास कार्य कराये जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा विशेष जोर
उन्होंने बताया कि चिन्हित गांवों की विकास कार्ययोजना में सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को बेहतर बनाने, कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने, पेयजल की समस्या दूर करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षणिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में आवश्यकताओं का आकलन किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए रोजगारमूलक गतिविधियों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, पशुपालन और मछली पालन को बढ़ावा देने तथा वन उपज आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और ग्रामीणों की आय में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है।
100 गांवों को क्लस्टर में बांटकर सौंपी जिम्मेदारी
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित 100 गांवों को अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया गया है। सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इन गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद करने और अपने-अपने विभाग से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर सभी चिन्हित गांवों का भ्रमण पूरा करने, ग्रामीणों से चर्चा करने तथा आवश्यक विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान गांवों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति, ग्रामीणों की आवश्यकताओं और आजीविका के संभावित साधनों का आकलन किया जा रहा है। इससे प्रत्येक गांव की जरूरत के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकताएं निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
15 गांवों में पहुंचीं विभागीय टीमें
जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि गत दिवस विभिन्न विभागों के अधिकारियों की टीमों ने जिले के पांच विकासखंडों के 15 गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने गांवों की आवश्यकताओं को समझने, बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेने तथा कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, वन उपज और मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों की संभावनाओं पर चर्चा की। अधिकारियों की टीम ने लांजी विकासखंड के कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों का भ्रमण किया। बिरसा विकासखंड के दड़ेकसा, बिलालकसा और सोनगुड्डा गांवों में ग्रामीणों से संवाद किया गया। बैहर विकासखंड के लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठली गांवों में भी पहुंचकर विकास संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी ली। इसी तरह परसवाड़ा विकासखंड के चालीसबोड़ी और मोहनपुर तथा किरनापुर विकासखंड के सीतापार और बोरवन गांवों का भ्रमण किया गया। इन गांवों में ग्रामीणों से चर्चा कर स्थानीय आवश्यकताओं को समझने और संबंधित विभागों के माध्यम से विकास एवं रोजगारमूलक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जानकारी जुटाई गई।
ग्रामीणों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होंगे विकास प्रस्ताव
गांवों के भ्रमण के दौरान जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करेंगे। इनमें बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तथा आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने से संबंधित पहल शामिल होंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर