मप्र विधानसभा: शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस का हंगामा, रोजगार, खराब फसल और वीआईटी यूनिवर्सिटी का उठा मुद्दा
भाेपाल, 1 दिसंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हुआ। सदन में पहले दिन दिवगंतों को श्रद्धांजलि दी गई। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने निधन का उल्लेख किया। दिल्ली ब्लास्ट में जान गंवाने वाले, नक्सल मुठभेड़ में शहीद जवान और फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र समेत 14 लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ। सदन में खरीफ फसल, खिलाड़ियों, रोजगार, सिरप कांड, अतिवृष्टि से खराब हुई फसल, सहकारिता चुनाव, बिजली, बीमा राशि और वीआईटी यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया गया। इन मुद्दों पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।
एमपी विधानसभा शीतकालीन सत्र की कार्यवाही 11 बजे शुरू हुई। पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई। विधानसभा स्पीकर ने 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में जान गंवाने वालों का जिक्र किया। वहीं 19 नवंबर को छत्तीसगढ़ के राजनादगांव जिले के जंगल में नक्सलियों से हुई मुठभेड में शहीद हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी को श्रद्धांजलि दी। वहीं विपक्ष ने सिरप कांड में मारे गए बच्चों का उल्लेख होने की बात कही। इस पर पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा शुरू हो गया।
सिंघार ने कहा कि सत्ता पक्ष सत्ता के नशे में चूर है। छिंदवाड़ा मामले में श्रद्धांजलि पर भी दिक्कत हो रही है। यह सरकार की मामले में हुई लारपरवाही का नतीजा है। इंदौर में एमवाय अस्पातल में चूहों के कुतरने से जान गंवाने वाले बच्चों का भी जिक्र होना चाहिए। वहीं मंत्री विश्वास सांरग ने आपत्ति जताई और कहा कि यह कोई ध्यानाकर्षण पर चर्चा नहीं हो रही है। सदन में हंगामा होता देख विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में प्रकिया के अनुसार मुद्दे और मामला उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा समझनी चाहिए, किंतु परन्तु में न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि विषय पर केंद्रित रहें, अनुमति लेकर दूसरे विषय पर आएं। वहीं स्पीकर ने सदन की ओर से शोकाकुल परिवार को श्रद्धांजलि दी।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का बयान कार्यवाही से निलंबित हो। इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि हम उन्हें मुआवजा दे सकते हैं तो शोक संवेदना प्रकट भी नहीं कर सकते हैं क्या ? यह मानवता का मामला है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भावांतर को लेकर सवाल उठाए
भोपाल की हुजूर विधानसभा के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भावांतर को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम भावांतर के सही रेट नहीं बता पा रहे हैं। यह हमारी गलती है। हमारे अधिकारियों के साथ-साथ हम भी किसानों को सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। कृषि मंत्री और राजस्व मंत्री से आग्रह है कि बीमा कंपनी के अफसरों को निर्देश दिए जाएं कि अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और अनावृष्टि की स्थिति में किसानों के खेत में जाएं और किसानों के नुकसान का आकलन कर कार्रवाई करें। रामेश्वर के वक्तव्य के दौरान अभय मिश्र ने टोका टाकी की तो रामेश्वर ने कहा कि सरकार सबसे निपटना जानती है। सड़क का डामर हो या नहर पर सड़क का मामला हो, सबसे वसूली भी करना जानती है।
इस पर विधायक और नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि डामर की बात किसानों के मामले में क्यों हो रही है। इसे विलुप्त किया जाए। बाद में रामेश्वर ने कहा कि बीमा कंपनियों को उचित मुआवजा देने के लिए सरकार को दबाव बनाना चाहिए, ताकि किसानों का नुकसान होने से बचाया जा सके। अधिकारी इस मामले में सख्ती से कार्रवाई करें। रामेश्वर ने कहा कि किसानों को मुआवजे के लिए कोई और व्यवस्था अलग से हो सके तो सरकार से वह आग्रह करते हैं कि ऐसा किया जाए।
भावांतर कांग्रेस ने शुरू की, पैसा नहीं दिया
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भावांतर योजना कांग्रेस के समय शुरू हुई थी, लेकिन कांग्रेस ने पेमेंट नहीं किया। भाजपा की सरकार में भुगतान हो रहे हैं। इस पर शेखावत ने कहा कि यहां तो वही स्थिति है कि इधर-उधर की बात न कर ये बता कि कारवां लुटा कैसे।सहकारिता चुनाव 15 साल से नहीं हो पाने पर शेखावत ने सहकारिता मंत्री को घेरते हुए कहा कि 7 हजार करोड़ लेने वाली कंपनी 700 करोड़ देकर लूट रही है। 51 रुपए बीमा कंपनी मुआवजा देकर किसान को लूट रही है।
ईडी को बीजेपी का विंग घोषित कर देना चाहिए
भोपाल राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर ईडी द्वारा एक और एफआईआर दर्ज किये जाने पर उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि ईडी को भाजपा का विंग घोषित कर देना चाहिए। ईडी का रोज का यही काम है कि एक कांग्रेस के बड़े नेता को देखिए और उस पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करें। विधानसभा की कार्रवाई को लेकर उन्हाेंने कहा कि विधानसभा में कई विधायकों के प्रश्न को बदल दिए गए है इसको लेकर वह सदन मे मुद्दा उठाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष भी यह बात रखी जाएगी।
आदिवासी मजदूरों के भुगतान का मुद्दा उठा
नियम 138 (1) के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव अजय सिंह और हीरालाल अलावा ने पेश किया। इसमें सीहोर जिले के आदिवासी मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने और वन राज्य मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि यहां करीब 2000 मजदूरों का 8 करोड़ का भुगतान बकाया होने के बात सामने आई है। वहीं वन राज्य मंत्री ने कोई भी भुगतान लंबित नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि मजदूरों के खाते में भुगतान कर दिया गया है। अजय सिंह ने कहा कि उनका ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए जाने के बाद भुगतान किया गया है, क्या यह राशि सरकार पहले नहीं दे सकती थी। इस पर मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि 17 नवंबर और 26 नवंबर को पैसे मजदूरों के खाते में डाले गए हैं। इसके पहले भी समय-समय पर राशि का भुगतान किया जाता रहा है। विधायक अजय सिंह ने इस पर कहा कि सबसे पीड़ित वर्ग मजदूर होता है। उनका भी पैसा समय पर नहीं दिया जाता है। स्पीकर से आग्रह है कि मजदूरों का भुगतान समय-समय पर कराने की व्यवस्था कराएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे